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श्रीकृष्ण का सबसे प्रिय भोग है गोकुल पीठा, पढ़ें आसान विधि

सोमवार,अगस्त 10, 2020
Gokul Pitha Recipe Bengali
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सबसे पहले मावे को किसनी से कद्दूकस कर लें। फिर कड़ाही में धीमी आंच पर गुलाबी होने तक सेंक लें।
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यहां खास आपके लिए प्रस्तुत हैं 7 तरह के व्यंजनों की पारंपरिक विधियां। इन व्यंजनों को आप प्रसाद के रूप में भगवान श्री कृष्ण को चढ़ाएं।
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जन्माष्टमी के मौके पर भोग के लिए विशेष तौर से बनाए जाने वाले मावा-मिश्री के लड्डू की एकदम आसान विधि यहां आपके लिए प्रस्तुत है। आइए पढ़ें...
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पंचामृत का अर्थ है 'पांच अमृत'। पांचों प्रकार के मिश्रण से बनने वाले पंचामृत से श्र‍ीकृष्ण प्रसन्न होते है।
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जन्माष्टमी के मौके पर भोग के लिए विशेष तौर से बनाई जाने वाली पंजीरी खाने में तो स्वादिष्ट होती ही है, सेहत के लिए भी उतनी ही फायदेमंद होती है। आइए पढ़ें 5 तरह की पंजीरी बनाने की सरल विधियां...
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अगर आप श्रीकृष्ण जन्माष्‍टमी के खास मौके पर दूध से नि‍र्मित मिठाई मावा-मिश्री घर पर बनाना चाहती हैं तो यह सरल विधि आपके लिए ही है। आइए जानें...
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किसी भी चतुर्थी तिथि पर श्रीगणेश का पूजन करते समय मोदक का प्रसाद अर्पण करने से वे प्रसन्न होकर वरदान देते हैं। आइए जानें सरल विधि...
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एक कड़ाही में, नारियल, काजू, पिस्ता व शकर डालें तथा दूध डाल कर पकाते रहें। मावा जैसा गाढ़ा होने लगे तो आंच से उतारें व इलायची मिला लें। अब चावल
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मैदे को दूध के छींटे डाल-डालकर गीला कर लें। फिर किसी बर्तन में 1-2 घंटे दबाकर रखें। दो घंटे के पश्चात गीले मैदे को बारीक छलनी पर रखकर रगड़ें।
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सबसे पहले घी को पिघाल लें। अब एक परात में सत्तू का आटा छान लें। उसमें घी, शकर का बूरा और पिसी इलायची डालें और मिश्रण को हाथ से एकसार कर लें।
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ईद-उल-अजहा को 'नमकीन ईद' के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानें पर इस खास मौके पर बनाई जाने वाली खास डिशेस
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राखी का मौसम हो और पकवानों की बात न हो, ऐसा भला कैसे संभव है? आपके लिए हैं अलग-अलग तरह की मिठाई बनाने के कुछ विशेष टिप्स।
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भाई-बहन का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन आते ही तरह-तरह की मिठाइयां बनाने और खाने को जी मचलने लगता है। आइए राखी के इस पावन पर्व पर घर पर ही बनाइए यह मिठाइयां और
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ईद की नमाज सुबह दस बजे तक अदा कर ली जाती है। नमाज के बाद क़ुर्बानी का दौर शुरू होता है। इसके बाद साफ-सफाई और फिर गोश्त के हिस्से कर, पकाने का काम शुरू होता है।
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सबसे पहले गुड़ को गन्ने के रस में डालें और पिघलने के बाद साफ-सुथरे कपड़े से छान लें। अब कड़ाही में घी गर्म करके धीमी आंच पर आटे को सुनहरा होने तक भूनें।
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इस बार कई त्योहार कोरोना महामारी के चलते घरों में रहकर ही मनाए जा रहे हैं। ऐसे समय में इस बार बाजार से मिठाइयां खरीद कर लाना संभव नहीं है, क्योंकि हम सभी को सबके स्वास्थ्य का ध्यान भी रखना है
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साबूदाने की खिचड़ी बनाने से 3-4 घंटे पूर्व साबूदाने को भिगो कर रख दें। लौकी को कद्दूकस करें। एक कड़ाही में घी गरम करके उसमें जीरा, मीठा नीम व हरी मिर्च का छौक लगाएं।
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दाल बाटी एक पारंपरिक व्यंजन है, जो मालवा के साथ-साथ पूरे भारत भर में लोकप्रिय है। बाटी बनाना बहुत बड़ा काम नहीं है, इसे हर कोई बना सकता है।
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इस नागपंचमी पर बनाएं पारंपरिक शाही मीठा चूरमा। भगवान शिव और नागदेवता प्रसन्न होकर देंगे आशीष...
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