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पारसी धर्म का इतिहास और परंपरा जानिए

शनिवार,अगस्त 15, 2020
Zoroaster Spiritual Leader
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ईरान के प्राचीन धर्म के संस्थापक जरथुस्त्र से जुड़ा एक प्रसंग है। इस प्रसंग के अनुसार प्राचीन फारस के बल्ख राज्य का राजा गुस्तास्प पहली ही मुलाकात में उनके विचारों से इतना प्रभावित हो गया कि
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पारसी समाज में आज भी त्‍योहार उतने ही पारंपरिक तरीके से मनाए जाते हैं, जैसे कि वर्षों पहले मनाए जाते थे। जो बात पारसी नववर्ष को खास बनाती है, वह यह कि ‘नवरोज’ समानता की पैरवी करता है। इस बार 16 अगस्त 2020 को पारसी नववर्ष मनाया जा रहा है।
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भगवान बुद्ध के एक भारतीय भिक्षु का नाम है बोधिधर्म। बोधिधर्म के माध्यम से ही चीन, जापान और कोरिया में बौद्ध धर्म का विस्तार हुआ था। 520-526 ईस्वीं में चीन जाकर उन्होंने चीन में ध्यान संप्रदाय की नींव रखी थी। यही ध्यान पहले च्यान फिर झेन हो गया।
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'ईश्वर एक है, धर्म एक है, मानवता की एकता हो यह बहाई धर्म का खास संदेश है। प्रतिवर्ष 21 मार्च को बहाई नववर्ष मनाया जाता है।
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प्रतिवर्ष 21 मार्च को पारसी नववर्ष 'नवरोज' मनाया जाता है। असल में पारसियों का केवल एक पंथ-फासली-ही नववर्ष मानता है, मगर सभी पारसी इस त्योहार में सम्मिलित होकर इसे बड़े उल्लास से मनाते हैं, एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं
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अगस्त माह में पारसी समाज का नववर्ष मनाया जाता है। इस वर्ष यह त्योहार 17 अगस्त 2019 को मनाया जा रहा है...
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शनिवार, 17 अगस्त 2019 पारसी नववर्ष मनाया जा रहा है। यूं तो भारत के हर त्‍योहार में घर सजाने से लेकर मंदिरों में पूजा-पाठ करना और लोगों का एक-दूसरे को बधाई देना शामिल है।
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ईरान के प्राचीन धर्म के संस्थापक जरथुस्त्र से जुड़ा एक प्रसंग है। इस प्रसंग के अनुसार प्राचीन फारस के बल्ख राज्य का राजा गुस्तास्प पहली ही मुलाकात में उनके विचारों से इतना प्रभावित हो गया कि उसने महल में ही उनके रहने की व्यवस्था कर दी।
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जून को सूर्योदय से रात्रि तक सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि योग बना है। सोमवार को वट-सावित्री व्रत, सोमवती अमावस्या के साथ शनि जयंती है। यह तीनों पर्व मनाए जाएंगे।
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भगवान झूलेलाल के इस पर्व में जल की आराधना की जाती है। यह सिन्धी समुदाय का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन दिनों भगवान झूलेलाल वरुण देव का अवतरण करके अपने भक्तों के सभी कष्टों को
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संपूर्ण विश्व में मात्र भारत को ही यह सौभाग्य एवं गौरव प्राप्त रहा है कि यहां का समाज साधु-संतों के बताए मार्ग पर चलता आया है।
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प्रतिवर्ष 21 मार्च को पारसी नववर्ष 'नवरोज' मनाया जाता है। असल में पारसियों का केवल एक पंथ-फासली-ही नववर्ष मानता है, मगर सभी पारसी इस त्योहार में सम्मिलित होकर इसे बड़े उल्लास से मनाते हैं,
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ईरान पर इस्‍लामी विजय के पश्‍चात पारसियों को इस्लाम कबूल करना पड़ा तो कुछ पारसी धर्म के लोगों ने अपना गृहदेश छोड़कर भारत में शरण ली।
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मूसा का जन्म ईसा पूर्व 1392 को मिस्र में हुआ था। उस काल में मिस्र में फेरो का शासन था। उनका देहावसान 1272 ईसा पूर्व हुआ। ह. इब्राहीम के बाद यहूदी इतिहास में सबसे बड़ा नाम 'पैगंबर मूसा' का है। ह. मूसा ने यहूदी धर्म को एक नई व्यवस्था और स्‍थान दिया। ...
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यूं तो भारत के हर त्‍योहार में घर सजाने से लेकर मंदिरों में पूजा-पाठ करना और लोगों का एक-दूसरे को बधाई देना शामिल है। लेकिन पारसी समाज में आज भी त्योहार उतने ही पारंपरिक तरीके से मनाए जाते हैं, जैसे कि वर्षों पहले मनाए जाते थे।
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ईरान के प्राचीन धर्म के संस्थापक जरथुस्त्र से जुड़ा एक प्रसंग है। इस प्रसंग के अनुसार प्राचीन फारस के बल्ख राज्य का राजा गुस्तास्प पहली ही मुलाकात में उनके विचारों से इतना प्रभावित हो गया कि उसने महल में ही उनके रहने की व्यवस्था कर दी।
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ईसाई धर्म और इस्लाम से पहले अफ्रीका में कई तरह के धर्म प्रचलित थे जिनमें से आज भी कुछ धर्म प्रचलन में है। लेकिन अब इस्लामिक कट्टरता और ईसाई वर्चस्व के दौर के चलते उनका अस्तित्व लगभग खत्म होता जा रहा है। एक सर्वे के अनुसार...
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भारत में यहूदियों की मौजूदगी और उनके जीवन की कहानी कहते निबंधों के संग्रह 'जियूज़ एंड द इंडियन आर्ट प्रोजेक्ट' और 'वेस्टर्न जियूज़ इन इंडिया' का संपादन डॉक्टर कीनेथ रॉबिन्स और रब्बी मारविन तोकाएर ने किया है। डॉक्टर कीनेथ रॉबिन्स ने कहा कि उन्होंने ...
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पारसी नववर्ष का त्योहार दुनिया के कई हिस्सों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है जिसमें ईरान, पाकिस्तान, इराक, बहरीन, ताजिकिस्तान, लेबनान तथा भारत में भी यह दिन विशेष तौर पर मनाया जाता है। बदलते वक्त ने पारसी धर्म में भी जिंदगी ने कई खट्टे-मीठे ...
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