हिन्दू तमिल त्योहार आदि पेरुक्कू 2023 कब है, क्या करते हैं इस दिन
aadi perukku festival : हिन्दू तमिल संस्कृति में एक खास पर्व मनाया जाता है, जिसे आदि पेरुक्कू के नाम से जाना जाता है। इस त्योहार को पथिनेट्टम पेरुक्कू के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2023 में यह पर्व 3 अगस्त, गुरुवार को मनाया जा रहा है।
तमिल कैलेंडर के हिसाब से तमिलनाडु में आदि के महीने से मानसून की शुरुआत होती है। अत: इस महीने में खेत-खलिहान में बीज बोने, पौधे लगाने और जड़ने जैसी गतिविधियां संपन्न की जाती है, ताकि आदि पेरुक्कू जो कि बरसात, मानसून, नदी, जल और जल के संरक्षण की सीख देता पर्व है, जिसके माध्यम से जीवन को बनाए रखने के लिए कृतज्ञता जाहिर का त्योहार माना जाता है, जो कि राजा-महाराजा तथा शाही परिवारों के समय से मनाया जाने वाला खास पर्व है।
आइए जानते हैं क्या करते हैं इन दिनों में-
- इस दिन तमिल संस्कृति को मानने वाले लोज अम्मान देवताओं के रूप में प्रकृति माता की पूजा करते हैं।
- आदि के महीने में कावेरी नदी का आभार व्यक्त किया जाता है।
- आदि पेरुक्कू पर यदि अविवाहित युवतियां विधि-विधान के अनुसार चावल-गुड़ से बनी मिठाई और ताड़ के पत्तों की बालियां तथा काले रंग की माला चढ़ाकर पूजन करती है तो उन्हें मनचाहा वर प्राप्त होता है, ऐसी मान्यता है।
- आदि पेरुक्कू पर कावेरी नदी के पवित्र जल में डुबकी लगाकर अम्मन स्नान करके नए कपड़े पहने जाते हैं।
- आदि पेरुक्कू पर स्त्रियां चावल के अलग-अलग पकवान बनाकर कावेरी नदी को भोग लगाती हैं। इस तरह प्रकृति और जल/ नदी, वर्षा के प्रति धन्यवाद देकर उनसे उनकी कृपा, शांति-समृद्धि और सुखी जीवन की प्रार्थना करती है।
- इस दिन महिलाएं माता पार्वती का पूजन करके उन्हें चावल के पकवान, जैसे दही चावल, मीठा पोंगल, इमली चावल, नींबू चावल आदि बनाकर देवी पार्वती को प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं।
- आदि पेरुक्कू पर्व आने से पहले शादीशुदा महिलाएं अपने मायके जाकर एक माह तक वहां रहने के पश्चात आदि पेरुक्कू के अगले दिन अपने पति के साथ ससुराल आती हैं। तब मायके वाले अपने जंवाई को ससुराल में बुला कर उन्हें नए कपड़े उपहार के रूप में देकर विदा करते हैं।
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लेखक के बारे में
राजश्री कासलीवाल
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