कब होती है भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा? जानिए पूजन का महत्व और लाभ
Padmanabh Dwadashi 2026: पद्मनाभ द्वादशी हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। यह व्रत मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान विष्णु (विशेष रूप से उनके 'पद्मनाभ' रूप) को समर्पित है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को पद्मनाभ द्वादशी मनाई जाती है। यह तिथि पापांकुशा एकादशी के ठीक अगले दिन आती है, इसलिए इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। जानिए पद्मनाभ द्वादशी पर पूजन का महत्व और व्रत के फायदे के बारे में विस्तार से...
द्वादशी तिथि प्रारम्भ: 22 अक्टूबर 2026 को 02:47 बजे
द्वादशी तिथि समाप्त: 23 अक्टूबर 2026 को 02:35 बजे
पद्मनाभ द्वादशी व्रत पारण समय: 23 अक्टूबर को सुबह 06:27 से 08:42 बजे
भगवान विष्णु का अभिषेक व श्रृंगार
भगवान विष्णु को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) और शुद्ध जल से स्नान कराएं। उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, और अक्षत अर्पित करें। (ध्यान रहे कि विष्णु जी की पूजा में तुलसी दल का होना अनिवार्य है।)
पूजन विधि
- सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ (संभव हो तो पीले) वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु के समक्ष हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।
- भगवान की पूजा: भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक और धूप जलाएं।
- श्री हरि को चंदन, कमल के फूल, फल, मिठाई, तुलसी दल, और पान-सुपारी अर्पित करें।
- दिनभर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और रात में जागरण व कीर्तन करें।
- इस दिन जरूरतमंदों और गरीबों को अन्न और वस्त्र का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
कथा और आरती
पद्मनाभ द्वादशी की कथा सुनें या पढ़ें। इसके बाद 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें और अंत में भगवान विष्णु की आरती उतारें। पूजा के बाद ब्राह्मणों, गरीबों या ज़रूरतमंदों को भोजन कराएं, वस्त्र, अन्न या तिल का दान करें।
अनंत शयन रूप
इस दिन भगवान विष्णु के अनंत शेषनाग पर शयन करने वाले रूप और उनकी नाभि से ब्रह्मा जी के प्रकट होने वाले स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है। नाम का अर्थ: 'पद्म' का अर्थ है कमल और 'नाभ' का अर्थ है नाभि। भगवान विष्णु की नाभि से एक दिव्य कमल उत्पन्न हुआ था, जिस पर सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा जी विराजमान हैं। इसी कारण विष्णु जी को 'पद्मनाभ' कहा जाता है।
पद्मनाभ द्वादशी का महत्व
मोक्ष और सुख-समृद्धि की प्राप्ति: जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस दिन भगवान पद्मनाभ की पूजा करते हैं, उन्हें जीवन में समस्त भौतिक सुख, ऐश्वर्य, उत्तम स्वास्थ्य और अंत में विष्णु लोक (मोक्ष) की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि पद्मनाभ द्वादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। एकादशी के व्रत का पारण (व्रत खोलना) द्वादशी तिथि को ही किया जाता है। इसलिए एकादशी और द्वादशी का संयोजन पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देता है।
प्रसिद्ध पद्मनाभस्वामी मंदिर (तिरुवनंतपुरम)
केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर भगवान विष्णु के इसी स्वरूप को समर्पित है। पद्मनाभ द्वादशी के अवसर पर इस मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और भव्य उत्सव आयोजित किए जाते हैं।

