वराह जयंती 2026: क्यों जरूरी है भगवान वराह की पूजा? किसने लिया था यह अवतार? हैरान कर देगी यह कथा
Varaha Jayanti 2026 : वराह जयंती हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान विष्णु के तीसरे अवतार भगवान वराह के प्रकटोत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण कर पृथ्वी को रसातल (समुद्र की गहराई) से निकालकर उसकी रक्षा की थी। यह पर्व प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह जयंती 13 सितंबर, रविवार को मनाई जा रही है।
पूजा विधि और व्रत
प्रातःकाल उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। एक कलश की स्थापना कर उस पर भगवान वराह या भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान वराह को तुलसी दल, पुष्प, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य (पंचामृत व फल) अर्पित करें।
वराह अवतार की कथा सुनें और भगवान विष्णु के मंत्रों (जैसे: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या ॐ वराहाय नमः) का जाप करें। पूजा संपन्न होने के बाद इस दिन गरीबों या ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और तिल का दान देना शुभ माना जाता है। यह जयंती पर्व प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
पौराणिक कथा
दैत्य हिरण्याक्ष ने कठोर तपस्या करके वरदान प्राप्त कर लिया था और अति शक्तिशाली होकर देवताओं को पराजित कर दिया। उसने पृथ्वी को छीनकर समुद्र (रसातल) में छिपा दिया, जिससे सृष्टि में जीवन संकटापन्न हो गया।
भगवान विष्णु का वराह अवतार
पृथ्वी की रक्षा के लिए ब्रह्मा जी की नासिका (नाक) से एक सूक्ष्म वराह प्रकट हुए, जो देखते ही देखते विशालकाय रूप में बदल गए।
भगवान वराह ने किया पृथ्वी का उद्धार
भगवान वराह समुद्र में प्रविष्ट हुए और हिरण्याक्ष का वध करके पृथ्वी को अपने लंबे दांतों (दाढ़) पर उठाकर पुनः जल के ऊपर स्थापित किया।
वराह जयंती का महत्व
धार्मिक मान्यता मान्यता है कि वराह जयंती के दिन पूजा और व्रत करने से साधक के सभी पाप नष्ट होते हैं, धनधान्य की वृद्धि होती है और किसी भी प्रकार के भय या संकट से मुक्ति मिलती है। यह अवतार अधर्म पर धर्म की विजय और पृथ्वी के संरक्षण का प्रतीक है।

