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मौनी अमावस्या पर 4 ग्रहों की युति, 7 कार्य करेंगे तो होगा चमत्कार

Written By WD Feature Desk
Updated: शनिवार, 17 जनवरी 2026 (16:21 IST)
Mauni Amavasya 2026: माघ मास की तपस्या और मौन साधना का महापर्व 'मौनी अमावस्या' इस बार अपने साथ बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। 18 जनवरी 2026 को पड़ने वाली यह अमावस्या महज एक तिथि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का वह द्वार है जहाँ मौन रहकर आप स्वयं को ईश्वरीय शक्ति से जोड़ सकते हैं। इस पावन दिन को यादगार और फलदायी बनाने के लिए प्रस्तुत हैं वे 7 कार्य, जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
 
1. मौन की शक्ति से मुनि पद की प्राप्ति
इस दिन का सबसे बड़ा रहस्य इसके नाम में ही छिपा है। मौनी अमावस्या पर वाणी पर विराम लगाकर मन ही मन ईश्वर का स्मरण करने से व्यक्ति को 'मुनि पद' के समान पुण्य मिलता है। मौन रहकर की गई पूजा मानसिक शांति और संकल्प शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है।
 
2. पितरों का आशीर्वाद और दोषों से मुक्ति
यह दिन पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। पितृ दोष की शांति हेतु सूर्य देव को अर्घ्य दें और अपने पितरों का ध्यान करें। पीपल के वृक्ष की जड़ों में जल और मिठाई अर्पित करना आपके कुल के संकटों को दूर कर सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
 
3. ग्रहों के 'महा योग' और गंगा स्नान का पुण्य
18 जनवरी 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से चमत्कारी है। धनु राशि में चंद्रमा और मकर राशि में चार ग्रहों का मिलन एक दुर्लभ 'महा संयोग' बना रहा है। प्रयागराज के माघ मेले में गंगा की लहरों के बीच डुबकी लगाना इस बार अनंत गुना फल देने वाला माना जा रहा है।
 
4. संगम तट पर देवताओं का सानिध्य
ऐसी मान्यता है कि मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम और गंगा जल में साक्षात देवी-देवताओं का वास होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का अर्थ है स्वयं को दैवीय ऊर्जा से सराबोर कर लेना और अपने पापों का प्रक्षालन करना।
 
5. तिल और कंबल का गुप्त दान
अमावस्या पर दान का महत्व सर्वोपरि है। स्नान के पश्चात गरीब और जरूरतमंदों को तिल के लड्डू, तेल, आंवला, कंबल या ऊनी वस्त्र भेंट करें। कड़ाके की ठंड में किया गया यह सेवा भाव न केवल पुण्य बढ़ाता है, बल्कि कुंडली के शनि और राहु दोषों को भी शांत करता है।
 
6. श्रीहरि की शरण और दीपदान
भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए आज के दिन उनके समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ या उनके मंत्रों का जप करने से जीवन के अंधकार दूर होते हैं और श्रीहरि का वरदहस्त आपके परिवार पर बना रहता है।
 
7. पीपल की परिक्रमा और कच्चे सूत का संकल्प
अमावस्या की सुबह पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करना और उन पर कच्चा सूत लपेटना एक प्राचीन और सिद्ध परंपरा है। वृक्ष पर कच्चा दूध चढ़ाकर की गई यह पूजा दरिद्रता का नाश करती है और पितरों को तृप्ति प्रदान करती है।

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