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Mahananda Navami 2026: महानंदा नवमी पूजा विधि, महत्व, मुहूर्त और कथा, जानें इस दिन को विशेष कैसे बनाएं

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 27 जनवरी 2026 (09:52 IST)
Magha Gupta Navratri Navami: महानंदा नवमी एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है, जो शक्ति, विजय और समृद्धि का प्रतीक है। हिंदू धर्म में माघ मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इसे 'महानंदा नवमी' के नाम से जाना जाता है। यह दिन माघ गुप्त नवरात्रि का समापन दिन भी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा से माता पार्वती के अन्य स्वरूप देवी नंदा तथा देवी लक्ष्मी की पूजा करता है, उसके जीवन से दरिद्रता और दुखों का नाश होता है।ALSO READ: गुप्त नवरात्रि की खास साधना और पूजा विधि, जानें जरूरी नियम और सावधानियां
 
  1. महानंदा नवमी का महत्व (Significance)
  2. शुभ मुहूर्त 2026 (Subh Muhurat)
  3. संपूर्ण पूजा विधि (Pooja Vidhi)
  4. पौराणिक व्रत कथा (Vrat Katha)
  5. महानंदा नवमी (FAQs)

 

आइए जानते हैं वर्ष 2026 में महानंदा नवमी की तिथि, शुभ मुहूर्त और माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने की संपूर्ण विधि।

 

महानंदा नवमी का महत्व (Significance)

 
महानंदा नवमी के दिन माता पार्वती के ही एक अन्य स्वरूप देवी नंदा की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह देवी दुर्गा का ही एक रूप हैं। इस दिन नंदा माता तथा महानंदा नवमी को 'अक्षय पुण्य' देने वाली तिथि माना गया है। इस दिन मां लक्ष्मी के 'महानंदा' स्वरूप की पूजा से घर में स्थायी सुख-शांति आती है तथा दरिद्रता का नाश होता है। गुप्त नवरात्रि की नौवीं शक्ति की पूजा होने के कारण यह तांत्रिक और सात्विक दोनों तरह की पूजा के लिए सिद्ध दिन है। इस दिन गुप्त नवरात्रि का समापन भी होता है। सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत रखती हैं।

 

शुभ मुहूर्त 2026 (Subh Muhurat)

 
महानंदा नवमी तिथि प्रारंभ: 26 जनवरी 2026, 09:18 पी एम से।
 
महानंदा नवमी तिथि समाप्त: 27 जनवरी 2026, 07:05 पी एम तक।
 
पूजा का सबसे श्रेष्ठ समय: उदया तिथि के अनुसार 27 जनवरी 2026 सुबह और गोधूलि बेला (शाम) का समय।
 

संपूर्ण पूजा विधि (Pooja Vidhi)

 
साफ-सफाई: सुबह स्नान के बाद घर और पूजा स्थल को साफ करें। घर के मुख्य द्वार पर रोली से 'श्री' या 'स्वास्तिक' बनाएं।
 
स्थापना: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
 
दीप दान: महानंदा नवमी पर घी का अखंड दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
 
अभिषेक: मां लक्ष्मी को केसर मिश्रित दूध से अभिषेक कराएं।
 
अर्पण: गुलाब या कमल लाल फूल, इत्र, अक्षत और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें।
 
भोग: सफेद रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाएं।
 
मंत्र जाप: 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः' का जाप करें।
 

पौराणिक व्रत कथा (Vrat Katha)

 
श्री महानंदा नवमी व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार एक समय की बात है कि एक साहूकार की बेटी पीपल की पूजा करती थी। उस पीपल में लक्ष्मीजी का वास था। लक्ष्मीजी ने साहूकार की बेटी से मित्रता कर ली। एक दिन लक्ष्मीजी ने साहूकार की बेटी को अपने घर ले जाकर खूब खिलाया-पिलाया और ढेर सारे उपहार दिए। जब वो लौटने लगी तो लक्ष्मीजी ने साहूकार की बेटी से पूछा कि तुम मुझे कब बुला रही हो?
 
साहूकार की बेटी ने अनमने भाव से उसने लक्ष्मीजी को अपने घर आने का निमंत्रण तो दे दिया किंतु वह उदास हो गई। साहूकार ने जब पूछा तो बेटी ने कहा कि लक्ष्मीजी की तुलना में हमारे यहां तो कुछ भी नहीं है। मैं उनकी खातिरदारी कैसे करूंगी? साहूकार ने कहा कि हमारे पास जो है, हम उसी से उनकी सेवा करेंगे। फिर बेटी ने चौका लगाया और चौमुख दीपक जलाकर लक्ष्मीजी का नाम लेती हुई बैठ गई। तभी एक चील नौलखा हार लेकर वहां डाल गया। 
 
उसे बेचकर बेटी ने सोने का थाल, शाल दुशाला और अनेक प्रकार के व्यंजनों की तैयारी की और लक्ष्मीजी के लिए सोने की चौकी भी लेकर आई। थोड़ी देर के बाद लक्ष्मीजी गणेशजी के साथ पधारीं और उसकी सेवा से प्रसन्न होकर सब प्रकार की समृद्धि प्रदान की। अत: जो मनुष्य महानंदा नवमी के दिन यह व्रत रखकर श्री लक्ष्मी देवी तथा नंदा देवी का पूजन-अर्चन करता है उनके घर स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होकर दरिद्रता से मुक्ति मिलती है और दुर्भाग्य दूर हो जाता है।
 
संक्षेप में कहा जाए तो इस दिन देवी दुर्गा की पूजा करके व्यक्ति जीवन में सुख, शांति और सफलता प्राप्त कर सकता है। इस दिन के विशेष महत्व को समझकर श्रद्धा और आस्था से पूजा करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
 

महानंदा नवमी-(FAQs)

प्रश्न Q1. महानंदा नवमी पर कौन सा दान करना चाहिए? 
उत्तर: इस दिन सफेद अनाज (चावल), सफेद वस्त्र या घी का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
 
प्रश्न Q2. क्या महानंदा नवमी पर उपवास रखना जरूरी है? 
उत्तर: यदि आप उपवास नहीं रख सकते, तो सात्विक रहकर केवल माँ लक्ष्मी की पूजा और आरती करना भी शुभ होता है।
 
प्रश्न Q3. यह पर्व साल में कितनी बार आता है? 
उत्तर: महानंदा नवमी वर्ष में एक बार माघ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है।
 
Q4: महानंदा नवमी पर व्रत रखने का क्या महत्व है?
उत्तर: महानंदा नवमी पर व्रत रखने से शरीर और मन की शुद्धि होती है। व्रत रखने से देवी दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
 
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