jaya vijaya ekadashi 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। साल 2026 में यह 29 जनवरी, गुरुवार को मनाई जाएगी। पद्म पुराण के अनुसार, यह एकादशी इतनी शक्तिशाली है कि इसके प्रभाव से मनुष्य नीच योनि (जैसे भूत-प्रेत) से मुक्ति पा जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। माघ मास की 'जया एकादशी' विशेष रूप से विजय, मानसिक शांति और पापों के नाश के लिए जानी जाती है। आइए जानते हैं इस व्रत को करने से मिलने वाले 10 चमत्कारी लाभ और इसकी महिमा।
1. भयंकर परेशानियों से मुक्ति
जीवन में कई बार ऐसी समस्याएं आती हैं जिनका कोई समाधान नहीं सूझता। जया एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने का मार्ग पा लेता है। यह व्रत व्यक्ति के आत्मबल को बढ़ाता है।
2. शत्रुओं पर विजय और सफलता
जैसा कि नाम से स्पष्ट है- 'जया', यह एकादशी जीवन के हर क्षेत्र में विजय दिलाती है। इस व्रत के प्रभाव से गुप्त और प्रत्यक्ष शत्रुओं का नाश होता है। यदि आप किसी कानूनी विवाद या प्रतियोगिता में फंसे हैं, तो यह व्रत आपके लिए अत्यंत फलदायी है।
3. चंद्र दोष से मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एकादशी का सीधा संबंध चंद्रमा से होता है। व्रत रखने से कुंडली में चंद्र ग्रह शुभ फल देने लगता है। इससे व्यक्ति का मन शांत रहता है, अवसाद अर्थात डिप्रेशन दूर होता है और मानसिक एकाग्रता बढ़ती है।
4. संचित पापों और अशुभ संस्कारों का नाश
मनुष्य जाने-अनजाने में कई पाप कर्म करता है। पुराणों के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से कई जन्मों के अशुभ संस्कार नष्ट हो जाते हैं। इसे 'पापहारिणी' तिथि भी कहा जाता है, जो आत्मा को शुद्ध करती है।
5. धन, समृद्धि और वैभव की प्राप्ति
जो साधक नियमित रूप से एकादशी का पालन करते हैं, उनके घर में कभी दरिद्रता नहीं आती। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से जीवन में धन-धान्य और सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।
6. नीच योनि और प्रेत बाधा से मुक्ति
जया एकादशी की कथा में वर्णन है कि कैसे एक गंधर्व (पुष्पवान) और अप्सरा (पुंजिकस्थली) को पिशाच योनि से मुक्ति मिली थी। अतः इस व्रत को करने से व्यक्ति को प्रेत बाधा या किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का भय नहीं रहता।
7. पूजा का तीन गुना फल
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास में किए गए दान और व्रत का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। जया एकादशी पर की गई श्रीहरि की उपासना सामान्य दिनों के मुकाबले तीन गुना अधिक पुण्य प्रदान करती है।
8. भगवान श्रीराम और लंका विजय का प्रसंग
माना जाता है कि लंका पर विजय पाने के उद्देश्य से भगवान श्रीराम ने भी अपनी सेना के साथ समुद्र तट पर विजया/जया एकादशी के महात्म्य को समझा और व्रत किया था। यही कारण है कि इसे असंभव कार्यों को संभव बनाने वाली तिथि माना जाता है।
9. श्रीकृष्ण का युधिष्ठिर को उपदेश
महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर ने जब श्रीकृष्ण से माघ शुक्ल एकादशी की महिमा पूछी, तब स्वयं केशव ने इस व्रत की श्रेष्ठता बताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि यह व्रत वाजपेय यज्ञ के समान फल देने वाला है।
10. कार्यों की सिद्धि और सुरक्षा कवच
पद्म पुराण के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने वाले साधक पर भगवान विष्णु का 'सुरक्षा कवच' सदैव बना रहता है। उसके सभी रुके हुए कार्य आसानी से संपन्न होने लगते हैं और आने वाले संकट स्वतः ही टल जाते हैं।
जया एकादशी व्रत विधि (संक्षेप में):
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सुबह जल्दी उठकर स्नान के जल में गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान करें।
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भगवान विष्णु के सम्मुख दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें।
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पूरे दिन सात्विक रहें और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।
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शाम को फलहार ग्रहण करें और अगले दिन (द्वादशी) को ब्राह्मण भोज या दान के बाद व्रत का पारण करें।