अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर कैसे करें पूजन, जानिए सरल विधि

Ganesh Puja Vidhi
आज अंगारकी संकष्टी चतुर्थी (Angarki Sankashti Chaturthi) है। पौराणिक जानकारी के अनुसार भगवान श्री गणेश ने अंगारक (मंगल देव) की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान देकर कहा था कि जब भी मंगलवार के दिन चतुर्थी पड़ेगी तो उसे अंगारकी चतुर्थी के नाम से जाना जाएगा। अत: अंगारकी चतुर्थी के दिन श्री गणेश का पूजन बहुत फलदायी होता है। यहां पढ़ें आसान पूजा विधि-


आसान पूजा विधि- Puja Vidhi

श्री गणेश चतुर्थी पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं।

इसके बाद घर के मंदिर में गणेश प्रतिमा को गंगा जल और शहद से स्वच्छ करें।
सिंदूर, दूर्वा, फूल, चावल, फल, जनेऊ, प्रसाद आदि चीजें एकत्रित करें।

धूप-दीप जलाएं।

'ॐ गं गणपते नमः मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें। मंत्र जाप 108 बार करें।

गणेश जी के सामने व्रत करने का संकल्प लें और पूरे दिन अन्न ग्रहण न करें। व्रत में फलाहार, पानी, दूध, फलों का रस आदि चीजों का सेवन किया जा सकता है।

गणपति की स्‍थापना के बाद इस तरह पूजन करें-

- सबसे पहले घी का दीपक जलाएं। इसके बाद पूजा का संकल्‍प लें।

- फिर गणेश जी का ध्‍यान करने के बाद उनका आह्वन करें।

- इसके बाद गणेश को स्‍नान कराएं। सबसे पहले जल से, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण) और पुन: शुद्ध जल से स्‍नान कराएं।

- गणेश के मंत्र व चालीसा और स्तोत्र आदि का वाचन करें।

- अब गणेश जी को वस्‍त्र चढ़ाएं। अगर वस्‍त्र नहीं हैं तो आप उन्‍हें एक नाड़ा भी अर्पित कर सकते हैं।
- इसके बाद गणपति की प्रतिमा पर सिंदूर, चंदन, फूल और फूलों की माला अर्पित करें।

- अब बप्‍पा को मनमोहक सुगंध वाली धूप दिखाएं।

- अब एक दूसरा दीपक जलाकर गणपति की प्रतिमा को दिखाकर हाथ धो लें। हाथ पोंछने के लिए नए कपड़े का इस्‍तेमाल करें।

- अब नैवेद्य चढ़ाएं। नैवेद्य में मोदक, मिठाई, गुड़ और फल शामिल हैं।

- इसके बाद गणपति को नारियल और दक्षिण प्रदान करें।
- आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की शुभ चतुर्थी की कथा करें।

- अब अपने परिवार के साथ गणपति की आरती करें। गणेश जी की आरती कपूर के साथ घी में डूबी हुई एक या तीन या इससे अधिक बत्तियां बनाकर की जाती है।

- इसके बाद हाथों में फूल लेकर गणपति के चरणों में पुष्‍पांजलि अर्पित करें।

- अब गणपति की परिक्रमा करें। ध्‍यान रहे कि गणपति की परिक्रमा एक बार ही की जाती है।
- इसके बाद गणपति से किसी भी तरह की भूल-चूक के लिए माफी मांगें।

- पूजा के अंत में साष्टांग प्रणाम करें।

- पूजा के बाद घर के आसपास जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करें।

- गाय को रोटी या हरी घास दें। किसी गौशाला में धन का दान भी कर सकते हैं।

- रात को चंद्रमा की पूजा और दर्शन करने के बाद यह व्रत खोलना चाहिए।

- शाम को चंद्रमा निकलने से पहले गणपति जी की एक बार और पूजा करें और संकष्टी व्रत कथा का फिर से पाठ करें। अब व्रत का पारण करें।Angarki Sankashti Pujan Vidhi


Lord Ganesha
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