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Last Updated : मंगलवार, 28 नवंबर 2023 (20:06 IST)

Uttarkashi tunnel rescue : 17 दिन, 41 मजदूर, पढ़िए उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग हादसे की पूरी Timeline

Uttarkashi tunnel rescue : 17 दिन, 41 मजदूर, पढ़िए उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग हादसे की पूरी Timeline - Uttarkashi tunnel rescue full Timeline
Uttarkashi tunnel rescue Timeline :  आखिर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों को 17 दिन बाद निकाल लिया गया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, उत्तराखंड राज्य आपदा प्रतिवादन बल, सीमा सड़क संगठन और परियोजना का निर्माण करने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम (एनएचआइडीसीएल) और भारत तिब्बत सीमा पुलिस सहित सेना की कई एजेंसियां इसमें लगी हुई थीं। पढ़िए पूरा घटनाक्रम- 
 
12 नवंबर : दिवाली के दिन सुबह साढ़े पांच बजे निर्माणाधीन सिलक्यारा-डंडालगांव सुरंग का एक हिस्सा ढहने से 41 श्रमिक फंसे।
13 नवंबर : ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाले पाइप के जरिए सुरंग में फंसे श्रमिकों से संपर्क स्थापित हुआ । बचाव कार्यों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मौके पर पहुंचे। सुरंग के ढहे हिस्से पर जमे मलबे को हटाने में कोई खास प्रगति नहीं मिली, जबकि ऊपर से भूस्खलन जारी रहने से बचावकार्य मुश्किल हुआ । इसकी वजह से 30 मीटर क्षेत्र में जमा मलबा 60 मीटर तक फैल गया।
ढीले मलबे को ‘शाटक्रीटिंग’ की मदद से ठोस करने और उसके बाद उसे भेदकर उसमें बड़े व्यास के स्टील पाइप डालकर श्रमिकों को बाहर निकालने की रणनीति बनाई गई।
 
14 नवंबर : आगर मशीन की सहायता से मलबे में क्षैतिज ड्रिलिंग कर उसमें डालने के लिए 800 और 900 मिमी व्यास के पाइप मौके पर लाए गए । सुरंग में मलबा गिरने और उसमें मामूली रूप से दो बचावकर्मियों के घायल होने से बचाव कार्यों में बाधा आई।  
uttarkashi tunnel
विशेषज्ञों की एक टीम ने सुरंग और उसके आसपास की मिट्टी की जांच के लिए सर्वेंक्षण शुरू किया। सुरंग में फंसे लोगों को खाना, पानी, ऑक्सीजन और बिजली की आपूर्ति जारी है। सुरंग में कुछ लोगों ने उल्टी की शिकायत की जिसके बाद उन्हें दवाइयां भी उपलब्ध कराई गई ।
 
15 नवंबर : पहली ड्रिलिंग मशीन के प्रदर्शन से असंतुष्ट एनएचआईडीसीएल ने बचाव कार्य तेज करने के लिए दिल्ली से अत्याधुनिक अमेरिकी आगर मशीन मंगाई ।
 
16 नवंबर : उच्च क्षमता वाली अमेरिकी ऑगर मशीन जोड़कर सुरंग में स्थापित की गयी। मशीन ने मध्यरात्रि के बाद काम शुरू किया।
 
17 नवंबर : रातभर काम करने के बाद मशीन ने 22 मीटर तक ड्रिल कर चार स्टील पाइप डाले। पांचवें पाइप को डाले जाने के दौरान मशीन के किसी चीज से टकराने से जोर की आवाज आई, जिसके बाद ड्रिलिंग का काम रोका गया। मशीन को भी नुकसान हुआ। इसके बाद, बचाव कार्यों में सहायता के लिए उच्च क्षमता की एक और ऑगर मशीन इंदौर से मंगाई गई। 
 
18 नवंबर : सुरंग में भारी मशीन से कंपन को देखते हुए मलबा गिरने की आशंका के चलते ड्रिलिंग शुरू नहीं हो पाई। प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों की टीम और विशेषज्ञों ने पांच योजनाओं पर एक साथ काम करने का निर्णय लिया जिनमें सुरंग के उपर से क्षैतिज ड्रिलिंग कर श्रमिकों तक पहुंचने का विकल्प भी शामिल था।
 
19 नवंबर : ड्रिलिंग रूकी रही जबकि केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बचाव अभियान की समीक्षा की और कहा कि ऑगर मशीन के जरिए क्षैतिज ड्रिलिंग कर श्रमिकों तक पहुंचने का सर्वश्रेष्ठ विकल्प है। उन्होंने दो से ढ़ाई दिनों में सफलता मिलने की उम्मीद जताई।
 
20 नवंबर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फोन पर मुख्यमंत्री धामी से बातकर सुरंग में चल रहे बचाव कार्यों का जायजा लिया और श्रमिकों का मनोबल ऊंचा बनाए रखने पर जोर दिया। बचावकर्मियों ने मलबे में ड्रिलिंग कर छह इंच व्यास की पाइपलाइन डाली जिससे सुरंग में फंसे श्रमिकों को ज्यादा मात्रा में खाना, कपड़े तथा अन्य जरूरी चीजों की आपूर्ति करने में मदद मिली। हालांकि, ऑगर मशीन के सामने बोल्डर आने से रूकी ड्रिलिंग शुरू नहीं हो पायी।
labours stuck in tunnel
21 नवंबर : बचावकर्मियों ने सुरंग में फंसे श्रमिकों के सकुशल होने का पहला वीडियो जारी किया। सफेद और पीला हेल्मेट पहने श्रमिक पाइप के जरिए भोजन प्राप्त करते और एक दूसरे से बातचीत करते दिखाई दिए। सिलक्यारा सुरंग के बड़कोट छोर पर दो विस्फोट कर दूसरी ओर से ड्रिलिंग की शुरूआत की गयी। हालांकि, विशेषज्ञों ने बताया कि इस वैकल्पिक तरीके से श्रमिकों तक पहुंचने में 40 दिन लगने की संभावना है। एनएचआइडीसीएल ने ऑगर मशीन से सिलक्यारा छोर से फिर क्षैतिज ड्रिलिंग शुरू की।
 
22 नवंबर : 800 मिमी के व्यास की स्टील पाइपलाइन मलबे में 45 मीटर अंदर तक पहुंची और कुल 57 मीटर मलबे में से 12 मीटर को भेदा जाना शेष रह गया। सुरंग के बाहर एंबुलेंस को खड़ा किया गया। इसके अलावा, घटनास्थल से 30 किलोमीटर दूर चिन्यालीसौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 41 बिस्तरों का विशेष वार्ड बनाया गया। देर रात लोहे के सरिए और गर्डर सामने आने से ड्रिलिंग में फिर अवरोध आया।
 
23 नवंबर : अड़चन आने से बचाव अभियान में छह घंटे की देरी हुई। बाधा को दूर करने के बाद ड्रिलिंग फिर शुरू हुई। राज्य सरकार के नोडल अधिकारी ने बताया कि बुधवार को आई रूकावट के बाद ड्रिलिंग में 1.8 मीटर की प्रगति हुई। ऑगर मशीन के नीचे बने प्लेटफॉर्म में दरारें आने से ड्रिलिंग फिर रूकी।
 
24 नवंबर : बाधाओं को दूर कर 25 टन वजनी ऑगर मशीन से ड्रिलिंग फिर शुरू हुई। लेकिन कुछ देर बाद फिर लोहे का सरिया सामने आने से ड्रिलिंग रूक गयी। पिछले दो दिनों में अभियान को यह दूसरा झटका लगा है। ऑगर मशीन का शाफ्ट और ब्लेड क्षतिग्रस्त होकर बन रही रेस्क्यू टनल में फंस गए। 
25 नंवबर : अमेरिकी निर्मित बरमा मशीन द्वारा ड्रिलिंग एक और तकनीकी खराबी आने के बाद शुक्रवार रात रोक दी गई। बचावकर्मियों ने मलबे के खोदे गए हिस्से के अंदर एक पाइप लगाने का फैसला किया है।  
 
26 नवंबर : ऑगर मशीन के क्षतिग्रस्त हिस्से को बाहर निकालने के लिए आवश्यक प्लाज्मा कटर सुरंग दुर्घटना स्थल पर पहुंच गया। वर्टिकल टनल ड्रिलिंग का निर्माण कार्य शुरू हुआ।
27 नवंबर :  मशीनें फेल, अब इंसानों के सहारे रेस्क्यू मिशन शुरू हुआ। रैट होल माइनिंग से रेस्क्यू का काम शुरू हुआ। मैन्युअल हॉरिजेंटल ड्रिलिंग के लिए दो प्राइवेट कंपनियों की दो टीमों को लगाया गया। 800 एमएम व्यास का पाइप डाला गया।   
 
28 नवंबर :  17 दिन बाद आखिरकार रेसक्यू में सफलता मिली  41 मजदूरों को निकाला गया।
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