सरकारी कंपनियों में निजी निवेश से 6 लाख करोड़ जुटाएगा केन्द्र, कांग्रेस ने कहा- राष्ट्रीय संपत्तियों को बेच रही है मोदी सरकार

Last Updated: सोमवार, 23 अगस्त 2021 (23:56 IST)
नई दिल्ली। वित्त मंत्री ने सोमवार को 6 लाख करोड़ रुपए की राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना (नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन-NMP) की घोषणा की। इसके तहत यात्री ट्रेन, रेलवे स्टेशन से लेकर हवाई अड्डे, सड़कें और स्टेडियम का मौद्रीकरण शामिल है। इन बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में निजी कंपनियों को शामिल करते हुए संसाधन जुटाए जाएंगे और संपत्तियों का विकास किया जाएगा।


निजी निवेश हासिल करने के लिए चेन्नई, भोपाल, वाराणसी एंव वडोदरा सहित भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) के करीब 25 हवाई अड्डे, 40 रेलवे स्टेशनों, 15 रेलवे स्टेडियम और कई रेलवे कॉलोनी की पहचान की गई है। इन्हें निजी क्षेत्र के निवेश से विकसित किया जाएगा।

योजना के तहत, निजी कंपनियां इन्विट मार्ग का इस्तेमाल करके एक निश्चित मुनाफे के लिए परियोजनाओं में निवेश कर सकती हैं। इसके अलावा इन परिसंपत्तियों को सरकारी एजेंसी को वापस करने से पहले एक निश्चित अवधि के लिए परिसंपत्तियों का संचालन और विकास कर सकती हैं। इसके तहत गोदाम और स्टेडियम जैसी कुछ संपत्तियां भी संचालन के लिए लंबी अवधि के पट्टे पर दी जा सकती हैं।
सीतारमण ने कहा कि संपत्ति मौद्रीकरण पाइपलाइन के जरिये एनआईपी (नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन) को अगले चरण में ले जाया गया है, जहां आप सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) पर ध्यान देंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि संपत्तियों के मौद्रीकरण में जमीन को बेचा नहीं जाएगा। एनएमपी ब्राउनफील्ड (मौजूदा) बुनियादी ढांचा संपत्तियों से संबंधित है, जहां निवेश पहले हो चुका है, जहां एक पूर्ण संपत्ति है जो या तो बेकार पड़ी है या जिसमें संभावनाओं का पूरा निवेश नहीं पाया है या जिसका क्षमता के अनुरूप इस्तेमाल नहीं हुआ है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इसलिए इसमें निजी भागीदारी लाकर, हम इसका बेहतर तरीके से मौद्रीकरण करने में सक्षम होंगे, और इसके माध्यम से हासिल होने वाले संसाधनों का बुनियादी ढांचे में और निवेश करने में सक्षम होंगे। एनएमपी के तहत वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2025 तक चार साल की अवधि में केंद्र सरकार की मुख्य संपत्तियों के माध्यम से 6 लाख करोड़ रुपए की निवेश संभावनाओं का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा एनएमपी में पहले से मौजूद संपत्तियों की बात की जा रही है जिनका बेहतर मौद्रीकरण करने की जरूरत है। संपत्ति का स्वामित्व सरकार के पास बना रहेगा और एक निश्चित समय के बाद उनका नियंत्रण लौटाना अनिवार्य होगा। सीतारमण ने कहा कि इसलिए ऐसी कोई अस्पष्टतता नहीं रहनी चाहिए कि सरकार कुछ बेच रही है। ऐसा नहीं है। ये मौजूदा संपत्तियां हैं, जिन पर सरकार का स्वामित्व बना रहेगा। मौद्रीकरण योजना का आधे से अधिक हिस्सा सड़क और रेलवे क्षेत्र से जुड़ा है।
इसके तहत 1.6 लाख करोड़ रुपए रुपये का सबसे बड़ा हिस्सा इस समय चालू राष्ट्रीय राजमार्गों और नयी सड़कों के 26,700 किलोमीटर के मौद्रिकरण से आएगा। इनमें से कुछ संपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इन्विट (इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) का रास्ता अपनाएगा। यानी इनविट के जरिये इन राजमार्गों के लिये संसाधन जुटाये जायेंगे।

अनुमानित 1.2 लाख करोड़ रुपये के मौद्रिकरण परियोजना में 400 रेलवे स्टेशनों, 90 यात्री ट्रेनों, 741 किलोमीटर लंबे कोंकण रेलवे और 15 रेलवे स्टेडियमों और कॉलोनियों का मौद्रिकरण करने की योजना है। निजी भागीदारी के जरिए इनका विकास किया जाएगा।

बिजली के 28,608 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनों के मौद्रीकरण से 45,200 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है और अन्य 39,832 करोड़ रुपए छह गीगावाट की विद्युत उत्पादन संपत्तियों से आएंगे। दूरसंचार क्षेत्र में भारतनेट फाइबर के 2.86 लाख किलोमीटर और बीएसएनएल एवं एमटीएनएल के 14,917 सिग्नल टावरों के मौद्रिकरण से 35,100 करोड़ रुपए मिलेंगे। इसी प्रकार गोदामों और कोयला खदानों में मौद्रीकरण से 29 हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा।

वहीं 8,154 किलोमीटर लंबे प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों के मौद्रीकरण से 24,462 करोड़ रुपए और 3,930 किलोमीटर उत्पाद पाइपलाइनों के मौद्रीकरण से 22,504 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। हवाई अड्डों के मौद्रीकरण से 20,782 करोड़ रुपए और बंदरगाहों से 12,828 करोड़ रुपए मिलेंगे।

का कटाक्ष : कांग्रेस ने सरकार की इस योजना पर हमला किया है। उसने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार राष्ट्रीय संपत्तियों को बेचने में लगी हुई है। मोदी सरकार टेलीकॉम से लेकर हर क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने को तैयार है। कांग्रेस ने बताया है कि सरकार इस प्रोग्राम के तहत 2.86 लाख किमी के भारतनेट फाइबर, बीएसएनएल और एमटीएनएल टॉवर बेचने जा रही है।



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