भारत में आतंकवाद फैला रहा है पाकिस्तान-राजनाथसिंह

नई दिल्ली| Last Updated: गुरुवार, 21 जुलाई 2016 (14:46 IST)
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नई दिल्ली। कश्मीर घाटी में अशांति के लिए को दोषी ठहराते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने गुरुवार को कहा कि कश्मीरी हमारे अपने लोग हैं जिन्हें बरगलाया जा रहा है, लेकिन हम कश्मीरियत, जम्हूरियत एवं इंसानियत के साथ कश्मीर के हालात को सामान्य बनाएंगे और उसके गौरव एवं शोहरत को बहाल करेंगे। राजनाथ ने कहा कि गैर-घातक हथियारों के रूप में पैलेट गन का विकल्प तलाशने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा, जो 2 महीने में रिपोर्ट पेश करेगी।
 
 
गृहमंत्री ने कहा कि आज कश्मीर के हालात को बिगाड़ने में पड़ोसी देश की भूमिका है, उसे नकारा नहीं जा सकता। पाकिस्तान कश्मीर में को प्रायोजित कर रहा है। उसका नाम पाक है लेकिन उसकी सारी हरकतें नापाक हैं। वह भारत को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। 
 
कश्मीर की स्थिति पर लोकसभा में नियम 193 के तहत हुई अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए राजनाथ ने कहा कि पाकिस्तान का निर्माण मजहब के आधार पर हुआ था। हम सोचते थे कि मजहब के आधार पर विभाजन के बाद वह शांति से रहेगा, लेकिन भारत में आतंकवाद पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद है।
 
गृहमंत्री ने कहा कि मजहब के आधार पर विभाजन के बाद बना पाकिस्तान एकजुट नहीं रह सका और उसके 2 टुकड़े हो गए। धर्म के आधार पर बने इस देश में आज अलग-अलग तंजीमें आपस में लड़ रही हैं, खून-खराबा हो रहा है।
 
उन्होंने कहा कि भारत में रह रहे इस्लाम धर्म को मानने वाले लोगों की चिंता पाकिस्तान को करने की जरूरत नहीं है। राजनाथ ने अटल बिहारी वाजपेयी की कविता का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को चेताया- 'चिंगारी का खेल बुरा होता है, औरों के घर में आग लगाने का सपना, अपने ही घर में खड़ा होता है।' 
 
कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा अधिक सख्ती और पैलेट गन का उपयोग किए जाने के कुछ सदस्यों के सवाल पर उन्होंने कहा कि आतंकवाद से सख्ती से निपटा जाएगा लेकिन भीड़ से निपटने के लिए गैरघातक हथियारों का उपयोग किया जाता है। पहले आंसू गैस या पानी की बौछार जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं। 
 
राजनाथ सिंह ने कहा कि गैरघातक हथियारों के रूप में पैलेट गन का विकल्प तलाशने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा, जो 2 महीने में रिपोर्ट पेश करेगी तथा सुरक्षाबलों को अधिकतम संयम बरतने का निर्देश दिया गया है और उन्होंने इस क्रम में स्वयं ही सीआरपीएफ और बीएसएफ के शीर्ष अधिकारी से बात की है। मजबूरी में बलप्रयोग करना पड़े तो गैरघातक हथियारों का उपयोग किया जा सकता है।
 
उन्होंने कहा कि इस चर्चा के बाद उनकी यह धारणा और दृढ़ हुई है कि कश्मीर में स्थिति को सामान्य बनाने के मुद्दे पर राजनीतिक सोच से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दल एकजुट हैं। कश्मीर में जो कुछ भी हुआ उससे उन्हें और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बहुत पीड़ा है।
 
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने विदेश यात्रा के दौरान स्वयं अपनी तरफ से फोन करके उनसे कश्मीर के हालात के बारे में जानकारी ली। इसके बाद स्वदेश लौटने पर उन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर ही सबसे पहली बैठक की।
 
राजनाथ ने कहा कि उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बात कर राज्य की सुरक्षा स्थिति के बारे में कई बार चर्चा की है तथा वे मुख्यमंत्री तथा अन्य सुरक्षा अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं।
 
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए 3 सूत्रों- कश्मीरियत, जम्हूरियत एवं इंसानियत पर ध्यान देने को कहा था तथामौजूदा प्रधानमंत्री एवं उनकी सरकार भी इन्हीं सूत्रों को ध्यान में रखते हुए कश्मीर मुद्दे का हल निकालने की पक्षधर है तथा कश्मीर की पहचान कश्मीरियत पर भी जोर देना होगा। 
 
गृहमंत्री ने कहा कि कश्मीर मुद्दे के समाधान में हैवानियत का कोई स्थान नहीं होना चाहिए, जैसे सुरक्षा बलों के कर्मियों के मरने के बाद यदि कहीं जश्न मनाया जाए तो उसको स्वीकार नहीं किया जा सकता। कुछ लोग सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का जश्न मनाने की विकृत सोच रखते हैं।
 
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कश्मीर में जान गंवाई है, उस पर हम सभी को अफसोस है तथा कश्मीर में स्थिति सामान्य बनाने के लिए अधिकतम प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न दलों के नेताओं से भी बातचीत कर उनसे सुझाव लिए गए। वहां के लोगों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए वह खुद ही कश्मीर जाना चाहते थे। उन्होंने इस क्रम में मुख्यमंत्री महबूबा से बातचीत भी की और कहा कि वे अपनी यात्रा में नेहरू गेस्ट हाउस में रुकना चाहेंगे।
 
उन्होंने कहा कि महबूबा ने उनसे स्थिति थोड़ी सामान्य होने तक रुकने की बात की और कहा कि वे 1-2 दिनों में दिल्ली आएंगी और फिर संवाद शुरू करने के तरीके पर विचार किया जाएगा।
 
सिंह ने कहा कि वहां कुछ ताकतें नौजवानों को बरगलाने की कोशिश कर रही हैं और आजादी तथा जनमत संग्रह जैसी बातों को लेकर उन्हें उकसाती हैं। कश्मीर का नौजवान हमारा है और बरगलाए युवकों को सही रास्ते पर लाने की हम कोशिश करेंगे।
 
आतंकी बुरहान वानी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह हिजबुल का कमांडर था तथा सोशल मीडिया के जरिए लोगों को आतंकवाद के लिए उकसाता करता था। उसके खिलाफ विभिन्न जघन्य अपराधों के 15 से अधिक मामले दर्ज थे। सुरक्षाबलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर एक अभियान चलाया जिसमें वह तथा 2 अन्य आतंकवादी मारे गए।
 
उन्होंने कहा कि आतंकवादी को अदालत सजा देती है तो कुछ लोग उसे 'न्यायिक हत्या' बताते हैं। इसके साथ ही सुरक्षाकर्मी की मौत पर जश्न की भी बात होती है। ऐसी विकृत मानसिकता पर रोक होनी चाहिए।
 
गृहमंत्री ने कहा कि कश्मीर में स्थिति सामान्य बनाने के लिए हम जो करेंगे, सबको साथ लेकर करेंगे और सबको साथ लेकर चलेंगे। हम राजनीति में सरकार बनाने के लिए नहीं बल्कि देश बनाने के लिए आते हैं। कश्मीर के हालात हम सबको मिलकर सुधारने होंगे और निश्चित तौर पर हम कामयाब होंगे।
 
गृहमंत्री ने कहा कि कश्मीर में जो हुआ, उससे सभी को पीड़ा है। कश्मीर में सुरक्षा बलों को अधिकतम संयम बरतने को कहा गया था। कश्मीर में पहली बार पैलेट गन का प्रयोग नहीं किया गया। इसका उपयोग 2010 में भी किया गया था।
 
उन्होंने कहा कि कश्मीर में 2,180 नागरिक घायल हुए हैं जिनमें से लगभग 2,000 को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। 125 नागरिकों का उपचार चल रहा है तथा हाल की घटनाओं में 1 सुरक्षाकर्मी शहीद हुआ जबकि 38 नागरिकों की मौत हुई है।
 
सुरक्षा बलों ने कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने की पहल की है। इसका उदाहरण है कि 2012 में जहां 220 आतंकी घटनाएं हुईं जिसमें 15 नागरिक और 72 आतंकी मारे गए। 2015 में 205 आतंकी घटनाएं हुई जिसमें 17 नागरिक और 108 आतंकवादी मारे गए। इस वर्ष अब तक 52 आतंकी घटनाएं हुई जिसमें ताजा घटना से पहले तक 5 नागरिक और 86 आतंकी मारे गए। (भाषा)



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