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वोट चोरी और SIR पर बढ़ा विवाद, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की तैयारी में विपक्ष

Opposition preparing for impeachment against Chief Election Commissioner
चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहा विवाद अब और ज्यादा बढ रहा है। सूत्रों के मुताबिक विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। इसको लेकर मीटिंग भी की गई है। इसके साथ ही INDIA गठबंधन के नेता सोमवार शाम को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा कर सकते हैं।

बता दें कि कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने बिहार में SIR का विरोध किया था। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि बीजेपी वोट चोर कर रही है और इसमें चुनाव आयोग उसका साथ दे रहा है।

क्या महाभियोग आएगा : वोट चोरी को लेकर विपक्ष के आरोप के बाद चुनाव आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस कर इसका जवाब दिया था। अब इस मामले में सियासत चरम पर पहुंच गई है। रविवार को जहां चुनाव आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस कर विपक्ष को कटघरे में खड़ा कर दिया, वहीं आज विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात कही है। सूत्रों के मुताबिक, कई विपक्षी दल इस बात पर विचार कर रहे हैं कि मुख्य चुनाव आयोग के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना चाहिए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'वोट चोरी' वाले आरोप और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के लगातार विरोध के बीच चुनाव आयोग (ECI) ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और अपना जवाब दिया था।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को वोट चोरी समेत तमाम आरोपों और SIR को लेकर सवालों के खुलकर जवाब दिए और बताया, "SIR के बाद बिहार की मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए नामों की सूची SC के आदेश के बाद जिलाधिकारियों की वेबसाइटों पर डाल दी गई है।"

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने ये भी कहा, "सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के 56 घंटे के भीतर, जिन मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं थे, उन्हें जिलों की वेबसाइट पर डाल दिया गया।"
 
इस दौरान ज्ञानेश कुमार ने ये भी कहा, "ये एक मिथक है कि SIR जल्दबाजी में किया गया है। हर चुनाव से पहले मतदाता सूची को सही करना निर्वाचन आयोग का कानूनी कर्तव्य है। निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों के बीच भेदभाव नहीं कर सकता और सत्तारूढ़ और विपक्षी दल, दोनों ही चुनाव प्राधिकार के लिए समान हैं।"
 
ज्ञानेश कुमार ने ये भी कहा, "कांग्रेस नेता को मतदाता सूची में अनियमितताओं के अपने आरोपों पर सात दिन के भीतर शपथपत्र देना चाहिए, अन्यथा उनके वोट चोरी के दावे निराधार और अमान्य माने जाएंगे।" 
Edited By: Navin Rangiyal
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