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आतंकी संगठनों में ऑपरेशन ऑल आउट का खौफ

Published: सोमवार, 2 नवंबर 2020 (17:10 IST)
जम्मू। हिज्बुल मुजाहिदीन के चीफ कमांडर डॉ. सैफुल्लाह की मौत के बाद आतंकी संगठन हिज्बुल के नए सरगना का चेहरा सामने नहीं आया है। इसके पीछे एक वजह यह भी सामने आ रही है कि सुरक्षाबलों के ऑपरेशन ऑल आउट की आंधी के आगे फिलहाल कोई आतंकी संगठन और उनके कमांडर टिक नहीं पा रहे हैं।
 
ऐसे में जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह का दावा था कि इस समय कश्मीर में आतंकवाद अंतिम पड़ाव में है। आतंकवाद के समूल नाश के लिए सर्दियों के महीनों में भी उन्होंने ऑपरेशन ऑल आउट को जारी रखने का ऐलान किया है। हिज्बुल मुजाहीदीन के चीफ ऑपरेशनल कमांडर के मारे जाने को पुलिस की एक बड़ी उपलब्धि करार देते हुए डीजीपी ने कहा कि कश्मीर में सक्रिय कई आतंकी कमांडरों को मार गिराया गया है।
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आत्मसमर्पण का मिलेगा मौका : सिंह ने कहा कि यह अभियान इसी तरह से जारी रहेगा। अलबत्ता उन्होंने स्पष्ट किया ऑपरेशन आलआउट के चलते हथियार छोड़ने के इच्छुक आतंकवादियों को आत्मसमर्पण करने का पूरा मौका दिया जाएगा।
 
यह सच है कि सैफुल्लाह मीर उर्फ गाजी हैदर के मारे जाने से हिजबुल और पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है। घाटी में हिजबुल की कमर टूट गई है। मई महीने में रियाज नायकू को मारकर सुरक्षा बलों के हाथ सबसे बड़ी कामयाबी लगी थी। 
हुर्रियत प्रमुख का बेटा था जुनैद : इसके बाद सैफुल्लाह को कमान सौंपी गई थी। यह हिजबुल में सबसे लंबे समय से सक्रिय था। रियाज के बाद डिप्टी कमांडर माने जाने वाले जुनैद सेहरई को श्रीनगर में ढेर कर दिया गया। जुनैद हुर्रियत प्रमुख मोहम्मद अशरफ सेहरई का बेटा था, जो कश्मीर विश्वविद्यालय से एमबीए था। हिजबुल मुजाहिदीन का दक्षिणी कश्मीर में खासा प्रभाव है। वह मध्य कश्मीर और उत्तरी कश्मीर में भी अपनी पकड़ बनाने में जुटा हुआ है।
 
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान के इशारे पर हिजबुल घाटी में अपनी गतिविधियां संचालित करता था। कश्मीर के कमांडर के मारे जाने से पाकिस्तान तथा आईएसआई को अपनी गतिविधियां चलाने पर ब्रेक लग गया है। सैफुल्लाह के मारे जाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब युवा संगठन में शामिल होने से कतराएंगे। 
हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि कश्मीरी आतंकियों के सबसे बड़े संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की ऑपरेशनल कमान सैफुल्लाह के बाद जुबैर अहमद वानी को मिल सकती है। उसे बहुत क्रूर और चालाक माना जाता है। 
 
हालांकि कमांडर की दौड़ में दो अन्य आतंकी फारूक अहमद बट और अशरफ मौलवी भी हैं, लेकिन अशरफ मौलवी का एक बाजू बेकार हो चुका है। यहीं पर उसका नंबर कट सकता है। रियाज नाइकू की मौत के बाद जब सैफुल्लाह को ऑपरेशन चीफ बनाया गया था तो फारूक बट को उसका डिप्टी बनाया गया था।
लेखक के बारे में
सुरेश एस डुग्गर
सुरेश डुग्गर वेबदुनिया के लिए जम्मू कश्मीर से समाचार संकलन के लिए अधिकृत हैं। वे तीन दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।.... और पढ़ें

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