राजनीतिक वंशवाद लोकतंत्र में नए तरह की तानाशाही, मोदी का परिवारवाद पर प्रहार

Last Updated: मंगलवार, 12 जनवरी 2021 (17:32 IST)
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को पर कड़ा प्रहार किया और इसे लोकतंत्र में तानाशाही का एक नया रूप करार देते हुए कहा कि यह देश पर अक्षमता का बोझ भी बढ़ा देता है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए दूसरे 'राष्ट्रीय युवा संसद महोत्सव' के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वंशवाद की वजह से राजनीति में आगे बढ़े लोगों को लगता है कि उनके पहली की पीढ़ियों के भ्रष्टाचार का हिसाब नहीं हुआ तो उनका भी कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। वे तो अपने घर में ही इस प्रकार के विकृत उदाहरण भी देखते हैं इसलिए ऐसे लोगों का कानून के प्रति ना सम्मान होता है, ना ही उन्हें कानून का डर होता है।
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प्रधानमंत्री ने राजनीतिक वंशवाद को लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया और इसे जड़ से उखाड़ फेंकने का आह्वान करते। उन्होंने यह दावा किया कि अब केवल सरनेम के सहारे चुनाव जीतने वालों के दिन लदने लगे हैं। उन्होंने राजनीति को सार्थक बदलाव का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि जब तक देश का सामान्य युवा राजनीति में नहीं आएगा, वंशवाद का जहर इसी तरह लोकतंत्र को कमजोर करता रहेगा। पिछले 6 वर्षों में देश की राजनीति में आए बदलावों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा और बिना किसी का नाम लिए कहा कि भ्रष्टाचार जिनकी विरासत थी, उनका भ्रष्टाचार ही आज उन पर बोझ बन गया है। ज्ञात हो कि वंशवाद की राजनीति के लिए भाजपा अक्सर कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों पर हमले करती रही है।
मोदी ने कहा कि यह देश के सामान्य नागरिक की जागरूकता की ताकत है कि वो लाख कोशिशों के बाद भी इससे उबर नहीं पा रहे हैं। देश ईमानदारों को प्यार दे रहा है। इसके बावजूद कुछ बदलाव अभी भी बाकी हैं और इन बदलावों को लाने के लिए देश के युवाओं को आगे आना होगा। लोकतंत्र का एक सबसे बड़ा दुश्मन पनप रहा है और वह है राजनीतिक वंशवाद। राजनीतिक वंशवाद देश के सामने ऐसी ही चुनौती है जिसे जड़ से उखाड़ना है। यह बात सही है कि अब केवल सरनेम के सहारे चुनाव जीतने वालों के दिन लदने लगे हैं। लेकिन राजनीति में वंशवाद का यह रोग अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। देश की राजनीति में अभी भी ऐसे लोग हैं जिनका आचार, विचार और लक्ष्य सब कुछ अपने परिवार की राजनीति और राजनीति में अपने परिवार को बचाने का ही है। राजनीतिक वंशवाद लोकतंत्र में एक नए रूप की तानाशाही के साथ ही देश पर अक्षमता का बोझ भी बढ़ा देता है।
मोदी ने कहा कि राजनीतिक वंशवाद 'देश प्रथम' के बजाय सिर्फ मैं और मेरा परिवार की भावना को मजबूत करता है। यह भारत में राजनीतिक और सामाजिक भ्रष्टाचार का भी एक बहुत बड़ा कारण है। इस स्थिति को बदलने का जिम्मा देश की युवा पीढ़ी पर है। लेना और पाना छोड़ कुछ कर गुजरने के इरादे से जब तक देश का सामान्य युवा राजनीति में नहीं आएगा, वंशवाद का यह जहर इसी तरह हमारे लोकतंत्र को कमजोर करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए युवाओं का राजनीति में आना जरूरी है। आपकी जिम्मेदारी है कि भारत के भविष्य का नेतृत्व करें। आपकी यह जिम्मेदारी देश की राजनीति को लेकर भी है, क्योंकि राजनीति देश में सार्थक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम है। हर क्षेत्र की तरह राजनीति को भी युवाओं की बहुत ज्यादा जरूरत है। नई सोच, नई उर्जा, नए सपने और नई उमंग की देश की राजनीति को बहुत जरूरत है।
मोदी ने कहा कि लोगों के मन में यह धारणा बन गई थी कि अगर कोई नौजवान राजनीति के क्षेत्र में जाता है तो वह बर्बाद हो जाएगा। लोग यहां तक भी मानने लगे थे कि सब कुछ बदल सकता है, लेकिन सियासत नहीं बदल सकती लेकिन आज स्थिति में बदलाव आया है और ईमानदार लोगों को भी राजनीति में जगह मिल रही है। आज आप देखिए कि देश की जनता इतनी जागरूक हो गई है कि वह राजनीति में ईमानदार लोगों के साथ खड़ी होती है। इसकी वजह से अब जनप्रतिनिधि भी यह समझने लगे हैं कि अगले चुनाव में जाना है तो कामों का हिसाब पुख्ता होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में नई राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति का भी जिक्र किया और कहा कि इसका मुख्‍य उद्देश्‍य बेहतर व्‍यक्ति के निर्माण के माध्‍यम से बेहतर राष्‍ट्र का निर्माण करना है। स्‍वामी विवेकानंद के बारे में विस्तार से उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने नौजवानों की शारीरिक और मानसिक, दोनों ही क्षमताओं के विकास पर जोर दिया।
देश के आजाद होने के इतने वर्षों बाद भी आज हमें समाज में स्‍वामी विवेकानंदजी का प्रभाव स्‍पष्‍ट रूप से दिखाई देता है। स्‍वामीजी ने अध्‍यात्‍म, राष्‍ट्रवाद और राष्‍ट्र निर्माण और मानवता की सेवा के बारे में जो विचार व्‍यक्‍त किए उनका आज भी हमारे देश के लोगों के मन पर असर है। इस साल युवा संसद प्रतियोगिता की पहली विजेता उत्तरप्रदेश की मुदिता मिश्रा जबकि दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र की अयति मिश्रा रहीं। तीसरे स्थान पर सिक्किम के अविनाम रहे। कार्यक्रम के दौरान तीनों विजेताओं ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्‍यक्‍त किए। प्रधानमंत्री ने तीनों युवाओं के विचारों और उनकी भाषण शैली की सराहना की और बाद में उनके संबोधनों की वीडियो क्लीपिंग अपने ट्विटर अकाउंट से साझा की।
इस अवसर पर लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिरला, शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और युवा तथा खेल मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू भी उपस्थित थे। बिरला ने भारत को समृद्धि और प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए युवाओं का आह्वान किया तथा उम्मीद जताई कि युवा संसद राष्ट्र सर्वप्रथम की भावना को ध्यान में रखते हुए लोकतंत्र को मजबूत करने में एक लंबा रास्ता तय करेगी। आने वाले वर्षों में भारतीय युवा अपने तकनीकी ज्ञान और कौशल के माध्यम से एक नवाचार आधारित दुनिया में सबसे आगे होंगे।
इस अवसर पर रिजिजू ने आशा व्यक्त की कि राष्ट्रीय युवा संसद युवाओं को अपने सामाजिक और आर्थिक विचारों को साझा करने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रसार करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। राष्ट्रीय युवा महोत्सव हर साल 12 से 16 जनवरी तक मनाया जाता है। 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती को 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस साल राष्ट्रीय युवा महोत्सव के साथ राष्‍ट्रीय युवा संसद समारोह भी आयोजित किया जा रहा है। राष्ट्रीय युवा महोत्सव का उद्देश्‍य देश के युवाओं की प्रतिभा सामने लाने तथा उन्‍हें अपनी प्रतिभा को दर्शाने का मंच प्रदान करना है। (भाषा)



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