शाह को ममता ने दी चुनौती, पहले अभिषेक के खिलाफ चुनाव लड़कर दिखाएं

पुनः संशोधित शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021 (00:44 IST)
पाइलान (पश्विम बंगाल)। केंद्रीय गृहमंत्री के 'दीदी-भतीजा' कटाक्ष को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनौती दी कि अमित शाह पहले उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़कर दिखाएं और फिर उनसे लड़ने की सोचें।
दक्षिण 24 परगना जिले के पाइलान में एक रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि अभिषेक यदि चाहते तो वे राज्यसभा सदस्य बनकर सांसद बनने का आसान रास्ता चुन सकते थे, लेकिन उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा और जनादेश प्राप्त किया।

बनर्जी ने कहा कि दिन-रात वे दीदी-भतीजे के बारे में बात कर रहे हैं। मैं अमित शाह को चुनौती देती हूं कि वह पहले अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ें और फिर मुझसे। शाह सहित भाजपा नेता बनर्जी पर प्राय: वंशवाद की राजनीति का आरोप लगाते रहे हैं और कहते रहे हैं कि ‘भतीजे’ को विशेष तरजीह मिलती है तथा अंतत: उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा।

बनर्जी ने शाह पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आपका बेटा क्रिकेट प्रशासन का हिस्सा कैसे बना और कैसे करोड़ों रुपए कमाए? उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य में पिछले सभी चुनावों का रिकॉर्ड तोड़ेगी और अधिकतम वोट हासिल कर आगामी विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक सीट जीतेगी।

शाह ने साधा ममता सरकार पर निशाना : पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार पर ‘कट मनी और गिरोह संस्कृति’ शुरू करने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि सत्ता में आने पर भाजपा चक्रवात ‘अम्फान’ राहत कोष में गबन की जांच कराएगी और दोषियों को जेल भेजेगी।

शाह ने कहा कि भाजपा की ‘परिवर्तन यात्रा’ मुख्यमंत्री, विधायक या मंत्री को बदलने के लिए नहीं बल्कि घुसपैठ को बंद करने तथा पश्चिम बंगाल को एक विकसित राज्य में परिवर्तित करने की है। उन्होंने यहां एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि परिवर्तन यात्रा मुख्यमंत्री या किसी मंत्री को बदलने के लिए नहीं है। यह तो घुसपैठ को बंद करने तथा बंगाल का कायाकल्प करने के लिए है। आप भाजपा को वोट तो करो, अवैध प्रवासी तो क्या, सीमापार से एक पंछी को भी राज्य में घुसने की इजाजत नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि ‘भाजपा की लड़ाई बंगाल को ‘सोनार बांग्ला’ बनाने की है। यह लड़ाई बूथ स्तर के हमारे कार्यकर्ता और के गिरोह के बीच है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की घटनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि दोषियों को सलाखों के पीछे डाला जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा सत्तारूढ़ तृणमूल के ‘गुंडों’ और ‘गिरोह’ से निबटने के लिए तैयार है।

शाह ने ‘अम्फान’ चक्रवात के बाद राहत कोष वितरण में कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी तृणमूल शासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने चक्रवात अम्फान के बाद राहत राशि भेजी थी लेकिन तृणमूल के नेताओं ने इसमें सेंध लगाई। सत्ता में आने पर हम अम्फान राहत कोष के वितरण में भ्रष्टाचार की छानबीन के लिए एक जांच समिति बनाएंगे।

भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को सलाखों के पीछे डाला जाएगा।चक्रवात ‘अम्फान’ के कारण मई 2020 में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बांग्लादेश में बड़ी तबाही हुई थी। शाह ने कहा कि चक्रवात और प्राकृतिक आपदाओं से लोगों की जान बचाने के लिए एक कार्यबल गठित करेंगे।

‘जय श्रीराम’ के नारे को लेकर उपजे विवाद के बारे में शाह ने कहा कि बंगाल की मुख्यमंत्री अपनी तुष्टिकरण की राजनीति के चलते नारे के कारण नाराज हुईं। गौरतलब है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में ‘जय श्रीराम’ के नारे लगने से नाराज बनर्जी ने संबोधन करने से इनकार कर दिया था।

राज्य में राजनीतिक हिंसा के शिकार बने कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं के नामों का जिक्र करते हुए शाह ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने डर का माहौल बनाया लेकिन भाजपा, तृणमूल के ‘गुंडों’ का सामना करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि आपको लगता है कि हम तृणमूल कांग्रेस के गुंडों से डर जाएंगे? वे भाजपा को सत्ता में आने से नहीं रोक सकते। सत्ता में आने पर हम भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या में संलिप्त सभी साजिशकर्ता को जेल भेजेंगे। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के ‘गुंडो’ ने अब तक 130 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की जान ली है।

तृणमूल कांग्रेस में ‘वंशवादी राजनीति’ पर निशाना साधते हुए शाह ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी जनता के लिए काम करने के बजाए अपने भतीजे के कल्याण के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार की दिलचस्पी केवल भतीजा के कल्याण में है। जनता के कल्याण में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है।

शाह ने कहा कि भाजपा सत्ता में आती है तो राज्य में सातवां वेतन आयोग लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल की वित्तीय हालत इतनी खराब है कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिला। सत्ता में आने पर हम इसे लागू करेंगे।(भाषा)



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