भारत आ रहे चीतों की पहली तस्वीर, वेलकम के लिए कैसे तैयार है कूनो नेशनल पार्क, पढ़ें Ground Report

Author विकास सिंह| Last Updated: शुक्रवार, 16 सितम्बर 2022 (19:35 IST)
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70 साल बाद आखिरकार इंतजार की वह घड़ियां अब बस खत्म होने वाली है जब भारत की धरती पर चीतों की आमद एक बार फिर हो जाएगी। अब से कुछ ही घंटों के बाद नमीबिया से आठ चीतों को लेकर आ रहा स्पेशल बोइंग विमान मध्यप्रदेश में ग्वालियर एयरफोर्स के बेस स्टेशन पर लैंड करेगा। जहां से दो स्पेशल हेलिकॉप्टरों के जरिए चीतों को श्योपुर के ले जाया जाएगा।

चीतों के वेलकम के लिए तैयार कूनो-चीतों के वेलकम के लिए कूनो अभ्यारण्य पूरी तरह तैयार है। नमीबिया से आ रहे चीते विशेष हेलिकॉप्टरों के जरिए कूनो नेशनल पार्क के अंदर विशेष तौर पर बनाए गए दो हैलिपेडों पर उतरेंगे। कूनो नेशनल पार्क में कुल पांच हैलीपेड बनाए गए है जिनमें 2 हेलीपैड चीतों के लिए और तीन हैलीपेड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले के हेलीकॉप्टरों के लिए।

कूनो नेशनल पार्क में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह 11 बजे अपने जन्मदिन के अवसर पर स्वयं तीन चीतों को विशेष बाड़े में विमुक्त करेंगे। इसके साथ अन्य चीतों को बाड़े में शिफ्ट किया जाएगा। चीतों को रिलीज करने के लिए कूनो नेशनल पार्क में दो विशेष बाड़े बनाए गए है। पांच किलोमीटर दायरे में बने इन बाड़ों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ जगह वॉच टॉवर बनाए गए है जिससे चीतों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकें।

चीतों के सगे भाईयों को बाड़े में छोड़ेंगे पीएम मोदी-खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन चीतों को श्योपुर के कूनो पालपुर अभयारण्य के बाड़े में छोड़ेंगे, उसमें दो चीते आपस में सगे भाई हैं। पीएम मोदी जिन तीन चीतों को बाड़े में छोड़ेंगे, इनमें दो नर और एक मादा हैं। ये दोनों नर चीते सगे भाई हैं। भारत लाने के लिए जिन चीतों का चयन हुआ है, उनकी फिटनेस और शिकार की क्षमता के आधार पर इनका चयन किया गया है। कूनो नेशनल पार्क में कुल बीस चीते लाए जा रहे है जिसमें आठ नामीबिया से और 12 दक्षिण अफ्रीका से लाए जा रहे है। सभी चीते 4 से 6 साल के बीच के बताए जा रहे हैं।

चीतों की भूख मिटाने के विशेष इंतजाम-नामीबिया से भारत आने वाले चीतों की भूख मिटाने के लिए कूनो नेशनल पार्क में करीब 181 चीतल छोड़े गए हैं। ये चीतल प्रदेश के राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ स्थित चिड़ीखो अभयारण्य से लाए गए हैं। चिड़ीखो अभयारण्य में चीतल और हिरणों की तादाद बहुत ज्यादा है। इस कारण यहां से 181 चीतल कूनो लाए गए हैं। एकसपर्ट के मुताबिक चीतल को चीते का पसंदीदा शिकार बताया जाता है। और इसलिए अब
चीते अब इन्हीं चीतलों का शिकार करेंगे और अपनी भूख मिटा सकेंगे।
ग्रामीणों के घरों में होम स्टे बनाने का फैसला- चीतों को देखने के लिए कूनो में देश-विदेश के पर्यटकों का भारी संख्या में आना तय है। पर्यटकों को ठहराने के लिए स्थान और घुमाने वाले गाइडों की जरूरत पहले से महसूस होने लगी है। इसीलिए स्थानीय प्रशासन ने 50 आदिवासियों के घरों को ग्रामीण होम स्टे बनाने का फैसला लिया है। साथ ही 30 आदिवासी महिलाओं को टूरिस्ट गाइड भी बनाया गया है। चीतों की बसाहट के बाद कूनो सेंक्चुरी में पर्यटकों को जंगल, नदी, झरनों से लेकर जंगली जीवों की सटीक जानकारी मिले। साथ ही आसपास के पर्यटक, ऐतिहासिक व दार्शनिक स्थलों की जानकारी पर्यटकों को आसानी से मिले। जिसके लिए गाइड बनाई गई कई युवतियां पढ़ी लिखी हैं, जो अंग्रेजी भी को पढ़ और समझ सकती थीं। इन सभी को तीन महीने का प्रशिक्षण दिया गया है।

कूनो के आसपास रिसॉर्ट बनाने की होड़- कूनो नेशनल पार्क में चीतों के आने के बाद प्रदेश के सबसे पिछड़े जिलों में शुमार श्योपुर की किस्मत भी बदल रही है।
यहां पर रिसॉर्ट, होटल बनाने की होड़ सी लग गई है। कूनो नेशनल पार्क से सटे टिकटोली, मोरावन और सेसईपुरा में रिसॉर्ट बनाने की होड़ इस कदर मची हुई है कि इस इलाके में जमीनों की कीमत आसमान पर पहुंच गई है। जमीन खरीदने की सबसे अधिक मरामारी टिकटोली में जहां से कूनो में पर्यटकों की एंट्री होती है। चीतों के आने के बाद टिकटोली और मोरावन जैसे अति पिछड़े गांवों की तस्वीर भी बदलने लगी है।

स्थानीय आशीष सिंह कहते है कि कल तक यहां के लोगों की कोई पूछ परख नहीं थी लेकिन जैसे ही चीतों के आने की बात हुई यहां पर बाहरी लोगों को मजमा सा लग गया है। बाहर से आने वाले सबसे अधिक जमीन की तलाश कर रहे है। कल तक जो ग्रामीण अपनी जमीनों को कौड़ियों के भाव लाख- दो लाख रुपये बीघा में बेचना चाहते थे अब वह अपनी जमीनों को 20 लाख रुपए बीघा में भी बेचने को तैयार नहीं है।

इलाके के ऐसे लोग जो संपन्न थे उन्होंने अपनी जमीनों पर होटल और रिसोर्ट बनाने का काम भी शुरू कर दिया है। वहीं बाहर के उद्योगपति कूनो अभ्यारण्य के आसपास होटल रिसोर्ट बनाने के लिए किसी भी कीमत पर जमीन खरीदने के लिए तैयार हैं। वहीं चीतों के आने की खबर लगते ही यहां पर निर्माण कार्य में भी अचानक से तेजी आ गई है।


ऐसे स्थानीय लोग जिनकी सड़क किनारे जमीन या घर थे वह खुद की दुकान और मकान बनाने का काम शुरू कर दिया है। उन्हें उम्मीद है कि, चीता आ जाने के बाद यहां इतने ज्यादा पर्यटक आने लगेंगे कि, वह घर बैठे अच्छा खासा कमा लेंगे।

कूनो नेशनल पार्क में अप्रीकी चीतों के आने से स्थानीय लोगों को अपने दिन बदलने की आस लग गई है। प्रदेश के अति पिछड़े जिलों में शामिल श्योपुर एक आदिवासी बाहुल्य जिला है। ऐसे में कूनो नेशनल पार्क में चीतों के आने से श्योपुर जिला देश में पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुखता से आ गया है। श्योपुर के कूनो अभयारण्य से लगे टिकटोली गांव में रहने वाले ग्रामीण चीतों के आने से बेहद खुश है और उनको अब क्षेत्र के विकास के साथ रोजगार के नए अवसर मिलने की भी उम्मीद है।



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