हत्यारे ने कहा, धर्म के नाम पर मारी गोली, नहीं जानता था कौन है गौरी लंकेश

पुनः संशोधित शनिवार, 16 जून 2018 (17:46 IST)
5 सितंबर 2017 को देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला आज भी सबको याद है। बेंगलुरु में अपने पिता द्वारा चालू की गई पत्रिका 'लंकेश पत्रिका' की संपादक की उन्हीं के घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गौरी लंकेश कट्टर हिन्दूवादी सोच की आलोचक के रूप में जानी जाती थीं। उन्होंने महिला सशक्तीकरण और जातीय आधारित भेदभाव के विरुद्ध भी काम किया है। उनकी इसी निडर सोच की वजह से उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया
था।


गौरी लंकेश पर 3 हमलावरों ने 7 गोलियां चलाई थीं जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई थी।
आज तकरीबन 9 महीने की जांच के बाद स्पेशल इंवेस्टिगेटिंग टीम (एसआईटी) ने गौरी लंकेश के हत्यारे परशुराम वाघमारे
का पता लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया है। परशुराम ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि उसी ने गौरी लंकेश की हत्या की है और साथ ही यह भी बताया कि गोली चलाते वक्त वह नहीं जानता था कि वह किस पर गोली चला रहा है? पूछताछ में परशुराम ने बताया कि उसने अपने धर्म की रक्षा के लिए गौरी लंकेश की हत्या की।


26 साल के वाघमोरे ने बताया कि उसे 3 सितंबर को बेंगलुरु लाया गया था और उसे बंदूक का प्रयोग करना बेलगावी में सिखाया गया था। 5 सितंबर को उसे लंकेश के घर के सामने ले जाया गया और लंकेश के आते ही उसने गोली चलाई। गोली चलने के बाद वह वहां से भाग गया। वाघमोरे ने एसआईटी को यह भी बताया कि इस हत्या में 3 से अधिक लोग मिले हुए हैं।



श्रीराम सेना ने सदस्य मानने से किया इंकार : पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या की जांच कर रहे विशेष जांच दल ने मामले में श्रीराम सेना के विजयपुरा जिला अध्यक्ष राकेश मथ को पूछताछ के लिए समन भेजा है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यहां इसकी जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मथ से पूछताछ करने का निर्णय किया है, क्योंकि गौरी को गोली मारने वाला संदिग्ध परशुराम वाघमारे इसी हिन्दुत्ववादी संगठन का सक्रिय सदस्य है। एसआईटी में शामिल इस अधिकारी ने बताया कि वे इस बात का पता लगाना चाहते हैं कि गौरी की नृशंस हत्या में कहीं मथ का भी तो हाथ नहीं है अथवा इस साजिश में शामिल होने के लिए उन्होंने वाघमारे का ब्रेनवॉश तो नहीं किया है?

कर्नाटक के विजयपुरा जिले के सिंदागी शहर में जनवरी 2012 में तहसीलदार कार्यालय में पाकिस्तानी झंडा फहराया गया था। मथ और वाघमारे कथित रूप से इसमें शामिल थे। एसआईटी का मानना है कि कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों और मेंगलुरु सहित तटीय इलाकों में मथ का मजबूत आधार है। अधिकारी ने बताया कि हमने राकेश मथ को समन भेजा है और वह अब तक नहीं आया है।


इस बीच श्रीराम सेना के संस्थापक अध्यक्ष प्रमोद मुतालिक ने खुद को और अपने संगठन को वाघमारे और गौरी की हत्या से अलग कर लिया है। मुतालिक ने कहा कि श्रीराम सेना और वाघमारे के बीच कोई संबंध नहीं है। वह न तो हमारा सदस्य है और न ही हमारा कार्यकर्ता है। यह मैं स्पष्ट रूप से कह रहा हूं।

उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तानी झंडा फहराने का मामला सामने आया था तो कहा गया कि वाघमारे श्रीराम सेना का सदस्य है। हालांकि उन्होंने यह साबित कर दिया कि वाघमारे उनके संगठन का नहीं बल्कि आरएसएस का सदस्य है। मुतालिक ने जोर देकर कहा कि आरएसएस के ड्रेस में मैंने उसकी तस्वीर साझा की। मैंने उस वक्त कहा था कि वह श्रीराम सेना का नहीं, आरएसएस का कार्यकर्ता था। (एजेंसियां)



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