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  4. How will Tata benefit from Air India?
Written By वेबदुनिया न्यूज डेस्क
Last Updated: गुरुवार, 12 मई 2022 (14:00 IST)

Explainer : एयर इंडिया की 'घर वापसी' से टाटा को क्या फायदा होगा

टाटा सन्स की कंपनी टैलेस प्राइवेट लिमिटेड ने एयर इंडिया खरीदने के लिए 18,000 करोड़ रुपये की विजेता बोली लगाई। इसके साथ ही टाटा ग्रुप अब तीन एयरलाइन- विस्तारा, एयर एशिया और एयर इंडिया का मालिक हो गया है। 
 
टाटा सन्स के चेयरमैन रतन टाटा ने एयर इंडिया की 'घर वापसी' का स्वागत करते हुए ट्विटर पर कहा, वेलकम बैक, एयर इंडिया। उन्होंने जमशेदजी टाटा की एक तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि टाटा समूह का एयर इंडिया की बोली जीतना एक बड़ी खबर है। एयर इंडिया को फिर से खड़ा करने के लिए हमें काफी कोशिश करनी होगी। हमें उम्मीद है कि इससे टाटा समूह की एविएशन इंडस्ट्री में मौजूदगी से मजबूत व्यापारिक अवसर पैदा होंगे।
 
भावनात्मक रूप से कहें तो जेआरडी टाटा के नेतृत्व में एयर इंडिया ने एक समय में दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एयरलाइंस में से एक का रुतबा हासिल किया था। शुरुआती सालों में एयर इंडिया का जो साख और सम्मान था, टाटा समूह को उसे फिर से हासिल करने का एक मौक़ा मिला है। जेआरडी टाटा अगर हमारे बीच होते तो उन्हें बेहद खुशी होती।

चुनिंदा उद्योगों को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोले जाने के लिए अपनाई हालिया नीति के लिए हम सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं। वेलकम बैक, एयर इंडिया।


किस एयरलाइन में कितनी हिस्सेदारी : टाटा समूह को एयर इंडिया में शत प्रतिशत हिस्सेदारी मिली है। वहीं, विस्तारा एयरलाइन, टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड और सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड (एसआईए) का एक ज्वाइंट वेंचर है। इसमें टाटा संस की 51 फीसदी हिस्सेदारी है तो सिंगापुर एयरलाइन का स्टेक 49 फीसदी है। अगर एयर एशिया की बात करें तो इसमें टाटा संस की हिस्सेदारी 83.67 फीसदी है। 
 
दरअसल, साल 2013 में मलेशियाई एयरलाइंस कंपनी एयर एशिया बेरहाद और टाटा संस के ज्वाइंट वेंचर ने एयर एशिया की शुरुआत की थी। तब भी टाटा संस का हिस्सा 51 फीसदी था।  वहीं एयर एशिया बेरहाद की हिस्सेदारी 49 फीसदी थी। बीते साल एयर एशिया बेरहाद ने अपनी 32.67 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी, इसके बाद इस एयरलाइन में टाटा समूह की हिस्सेदारी बढ़कर 83.67 फीसदी हो गई है।
 
इसके अलावा घाटे में चलने के बावजूद एयर इंडिया के पास काफी परिसंपत्तियां है। 130 विमानों का बेड़ा और ट्रेंड पायलट और क्रू के अलावा टाटा समूह को इस सौदे के साथ ही देश के हवाई अड्डों पर 4400 घरेलू और 1800 अंतरराष्ट्रीय लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट्स और विदेशों में 900 स्लॉट्स मिलेंगे। 
 
इस सौदे में एअर इंडिया का मुंबई में स्थित हेड ऑफिस और दिल्ली का एयरलाइंस हाउस भी शामिल है। मुंबई के ऑफिस की मार्केट वैल्यू 1,500 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इसके अलावा कार्गो और ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी AISATS की आधी हिस्सेदारी भी मिलेगी। साथ ही भारत का विमानन क्षेत्र 20 फ़ीसदी की सालाना दर से बढ़ रहा है।
 

एयर इंडिया पर कुल 43 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। टाटा को 23,286 करोड़ रुपए का कर्ज चुकाना होगा। बाकी के कर्ज को सरकार की कंपनी एअर इंडिया एसेट होल्डिंग्स (AIAHL) को ट्रांसफर किया गया है यानी यह कर्ज सरकार खुद अपने ऊपर लेगी।
 
एयर इंडिया के आने से भारत में टाटा के पास एविएशन मार्केट का कुल 24 प्रतिशत शेयर आ जाएगा। इस समय एयर इंडिया 11, एयर एशिया 7 और विस्तारा 6 प्रतिशत मार्केट पर काबिज हैं। विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय बाजार की पूरी क्षमता का दोहन अभी तक नहीं हो पाया है और एयर इंडिया में टाटा समूह के लिए काफी संभावनाएं हैं। 
 
तो आखिर क्यों बिक गई एयर इंडिया : 2007 में सरकार ने फ्यूल की बढ़ती कीमत, प्राइवेट एयरलाइन कंपनियों से मिलते कॉम्पिटिशन के कारण सरकार ने एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का मर्जर कर दिया था। हालांकि, साल 2000 से लेकर 2006 तक एयर इंडिया मुनाफा कमा रही थी, लेकिन मर्जर के बाद परेशानी बढ़ गई। कंपनी की आय कम होती गई और कर्ज लगातार बढ़ता गया। कंपनी पर 31 मार्च 2019 तक 60 हजार करोड़ से भी ज्यादा का कर्ज था। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए अनुमान लगाया था कि एयरलाइन को 9 हजार करोड़ का घाटा हो सकता है। 
 

इस तरह घाटे से उबरेगी एयर इंडिया : एयर इंडिया को घाटे से उबारने के लिए अब सरकारी अधिकारियों की मुफ्त उड़ान बंद हो जाएगी। हालांकि एयर इंडिया में सफर करने संबंधी उनकी बाध्यता बनी रहेगी। अर्थात सरकारी अधिकारी एयर इंडिया से ही यात्रा करेंगे। इसके साथ ही एयर इंडिया में इस समय 12085 कर्मचारी हैं।
 
इनमें 8084 स्थायी हैं, जबकि 4001 संविदा पर हैं। 5 साल में 5000 स्थायी कर्मचारी रिटायर होंगे। हालांकि कंपनी पहले साल कोई छंटनी नहीं करेगी, लेकिन जरूरत पड़ी तो वीआरएस लाया जा सकता है। दूसरी ओर कर्मचारियों को 1332 करोड़ रुपए का भुगतान सरकार करेगी।