एलओसी पर स्नाइपर गोलीबारी से बीएसएफ अफसर शहीद

सुरेश एस डुग्गर| पुनः संशोधित मंगलवार, 1 दिसंबर 2020 (15:26 IST)
जम्मू। एलओसी पर राजौरी के मेंढर सेक्टर में पाकिस्तानी स्नाइपरों द्वारा की गई गोलीबारी ने बीएसएफ के एक अफसर की जान ले ली है। यह कोई पहला मौका नहीं है कि एलओसी पर स्नाइपर गोलीबारी ने सेना को परेशान किया हो बल्कि सीजफायर के 17 सालों के अरसे में अभी तक वह स्नाइपर फायर में 140 से अधिक जवान खो चुकी है।
अधिकारियों ने बताया कि पाक स्नाइपरों ने मेंढर के तारकुंडी में आज तड़के स्नाइपर से गोलियां दागी जिस कारण बीएसएफ की 59वीं बटालियन के सब इंस्पेक्टर पी जाथा की घटनास्थल पर ही तत्काल मौत हो गई।

प्राप्त समाचारों के अनुसार, इस घटना के बाद दोनों पक्षों में भीषण गोलाबारी आरंभ हो गई थी जिसमें पाक सेना को जबरदस्त क्षति पहुंचाई गई थी।
वैसे एलओसी पर स्नाइपर फायर से शहीद होने वाले पी जाथा पहले जवान नहीं हैं। बल्कि 17 सालों के सीजफायर के अरसे में 140 से अधिक जवान व अफसर शहादत पा चुके हैं। सितंबर के पहले हफ्ते में भी दो जवानों की मौत एलओसी पर स्नाइपर शाट से हुई थी। जबकि इस साल जून के बाद 32 जवानों को सेना एलओसी पर खो चुकी है।
दरअसल इन रहस्यमयी गोलीबारी की घटनाओं के पीछे पाक सेना के वे निशानेबाज हैं जो स्नाईपर राइफलों से भारतीय जवानों को निशाना बना रहे हैं। कई बार फ्लैग मीटिंगों में भारतीय पक्ष द्वारा इस पर आपत्ति जताई जा चुकी है लेकिन हर बार पाक सेना ऐसी किसी गोलीबारी की घटना से इंकार कर चुकी है।

नतीजतन रहस्यमयी गोलीबारी, जिसके पीछे भारतीय पक्ष के मुताबिक पक्के तौर पर पाक सेना और उसके वे आतंकी पिट्ठू हैं जो सीमा के उस पार पाक सीमा चौकियों पर शरण लिए हुए हैं, से सेना परेशान हो उठी है। ऐसी दशा में सेना के पास ऐसी रहस्यमयी गोलीबारी की घटनाओं और घुसपैठ के बढ़ते दबाव से निपटने का एक ही रास्ता बचा है और वह यह है कि एलओसी पर जारी सीजफायर समाप्त हो जाए।
एक सेनाधिकारी के अनुसार, सीजफायर ने पाक सेना को अपनी पोजिशनें मजबूत करने और घुसपैठ को कारगार ढंग से अंजाम देने का मौका दिया है।’

वर्ष 2003 में जब दोनों मुल्कों के बीच संघर्ष विराम समझौता हुआ तो कुछ अरसे तक एलओसी तथा इंटरनेशनल बार्डर पर शांति बनी रही थी पर यह ज्यादा देर तक इसलिए नहीं टिक पाई क्योंकि पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली रहस्यमयी गोलीबारी ने भारतीय जवानों की जानें लेनी आरंभ कर दी थी।
फिर जब इसके प्रति जानकारियां सामने आईं तो वे चौंकाने वाली थीं कि ऐसी रहस्यमयी गोलीबारी अर्थात स्नाइपर शाटों के पीछे पाक सेना के प्रशिक्षित कमांडों के साथ-साथ वे आतंकी भी थे जिन्हें पाकिस्तानी सेना ऐसी ट्रेनिंग दे रही थी।




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