CJP संस्थापक अभिजीत दीपके टाइफाइड की चपेट में, फिर भी जारी रखेंगे अपना आंदोलन
जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके बीमार हो गए। जांच में पता चला कि उन्हें टाइफाइड हो गया है। इसके बाद उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपने समर्थकों से कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक लड़ाई जारी रहेगी। ALSO READ: 'मेट्रो, इंटरनेट और खाना बंद करा दिया, पेपर लीक नहीं रोक पाए', जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच राहुल गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला
सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, टाइफाइड हो गया है, लेकिन जब तक धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जारी रहेगी लड़ाई नहीं देते, यह लड़ाई जारी रहेगी!
उन्होंने कहा कि जैसा की आप सभी को पता था कि पिछले कुछ दिनों से मेरी तबियत खराब चल रही थी। जांच रिपोर्ट आ गई है और मुझे टाइफाइड है। मेरा इलाज जारी है। रोज सुबह शाम में आईवी (Intravenous) लग रही है।
दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर जोर देते हुए आगे कहा कि मैं सभी कॉकरोच से जुड़ने वाले लोगों का धन्यवाद करना चाहूंगा, जो देशभर में शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट कर रहे हैं। इस आंदोलन को आप सभी ने सफल बना दिया है और मैं आश्वस्त हूं कि अगर इसी तरह शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट जारी रहा तो धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जरूर होगा।
Have been diagnosed with typhoid, but the fight will go on until Dharmendra Pradhan resigns! pic.twitter.com/8iHSZdF6K7
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) July 25, 2026
दीपके के स्वास्थ्य संबंधी मुख्य अपडेट्स:
बीमारी के लक्षण: दीपके को बीते कुछ दिनों से तेज बुखार, बॉडी पेन (शरीर में दर्द) और पाचन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।जांच में पुष्टि: डॉक्टरों द्वारा दिए गए परामर्श के बाद कराए गए ब्लड टेस्ट में टाइफाइड की पुष्टि हुई है।
आंदोलन पर प्रभाव: शारीरिक रूप से बेहद कमजोर होने के बावजूद दीपके ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों की सलाह पर दवाइयां लेने के साथ-साथ वे अपने जारी अभियानों और विरोध-प्रदर्शनों को रोकेंगे नहीं।
टाइफाइड क्या है?
टाइफाइड एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो टाइफाइड बुखार/ 'साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन के सेवन से फैलता है, और यह शरीर के अंदर प्रमुख रूप से आंतों, खून और अन्य अंगों को प्रभावित करता है। टाइफाइड एक संक्रामक बीमारी है, जो अगर सही समय पर इलाज न किया जाए, तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। ALSO READ: दिल्ली में आज 18 मेट्रो स्टेशन बंद, जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच DMRC का बड़ा फैसला
टाइफाइड के कारण:
1. दूषित पानी और भोजन:
टाइफाइड मुख्य रूप से दूषित पानी और खाने से फैलता है। जब व्यक्ति दूषित पानी या अस्वच्छ भोजन खाता है, तो बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
2. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना:
टाइफाइड से पीड़ित व्यक्ति के मल और मूत्र में बैक्टीरिया होते हैं। अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति ने संक्रमित व्यक्ति के मल या मूत्र से संपर्क किया हो, तो यह संक्रमण फैल सकता है।
3. स्वच्छता की कमी: अगर हाथ धोने की आदत न हो, खासकर खाना खाने से पहले, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
4. स्वास्थ्य सेवाओं की कमी: खराब जल आपूर्ति और अस्वच्छ शौचालय की स्थिति टाइफाइड के फैलने का प्रमुख कारण हो सकती है। ALSO READ: '11 किलो वजन घटा, ऑर्गन्स और ब्रेन को नुकसान हुआ', अनशन पर उठे सवालों से भड़के सोनम वांगचुक, बोले- क्या मुझे कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना होगा?
टाइफाइड के लक्षण
टाइफाइड के लक्षण आमतौर पर 1 से 3 सप्ताह के बीच दिखने लगते हैं, और इनकी गंभीरता बढ़ सकती है यदि समय पर इलाज न किया जाए। कुछ सामान्य लक्षण हैं:
1. बुखार: टाइफाइड का सबसे सामान्य लक्षण लगातार बुखार है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है और उच्चतम स्तर तक पहुंच सकता है। बुखार 39-40°C तक जा सकता है।
2. पेट दर्द: पेट में तेज दर्द और ऐंठन महसूस हो सकती है, खासकर पेट के निचले हिस्से में।
3. कमजोरी और थकान: टाइफाइड के कारण शरीर में अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होती है, जिससे सामान्य कार्यों को करना मुश्किल हो सकता है।
4. दस्त और कब्ज: कुछ मरीजों को दस्त और कुछ को कब्ज की समस्या हो सकती है।
5. सिर दर्द और मिचली: सिर दर्द, उल्टी, और मिचली की समस्या भी आमतौर पर टाइफाइड के लक्षण होते हैं।
6. लाल या पीले रंग का पेट: कुछ मामलों में पेट पर लाल या पीले चकत्ते हो सकते हैं।
7. बेहोशी या भ्रम: गंभीर मामलों में, रोगी को भ्रम, चक्कर, या बेहोशी का सामना करना पड़ सकता है।
टाइफाइड का उपचार
टाइफाइड का इलाज मुख्य रूप से एंटीबायोटिक्स के माध्यम से किया जाता है, लेकिन यह इलाज डॉक्टर की निगरानी में होना चाहिए। उपचार में शामिल कुछ सामान्य कदम हैं:
1. एंटीबायोटिक्स : टाइफाइड का इलाज मुख्य रूप से एंटीबायोटिक्स जैसे *सीफोटेक्साइम, सीफ्रेड, एज़िथ्रोमाइसिन* या *क्लोरम्फेनीकोल* के जरिए किया जाता है। डॉक्टर लक्षणों और बैक्टीरिया के प्रकार के अनुसार उचित एंटीबायोटिक निर्धारित करेंगे।
2. हाइड्रेशन : टाइफाइड में बुखार, दस्त और उल्टी के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए हाइड्रेशन बेहद जरूरी है। तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाना और ऑरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS घोल) लेना मददगार हो सकता है।
3. आहार : हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे खिचड़ी, दही, ताजे फल और सब्जियां खाएं। तैलीय और भारी भोजन से बचें।
4. बुखार को नियंत्रित करना : इसे नियंत्रित करने के लिए बुखार को कम करने वाली दवाइयां दी जाती हैं।
5. कृत्रिम चिकित्सा : गंभीर मामलों में, अस्पताल में इलाज की आवश्यकता हो सकती है, जिसमें फ्लूइड्स, पोषण, और मॉनिटरिंग शामिल है।
6. टीका : टाइफाइड से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है। यदि आप उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में यात्रा करने जा रहे हैं, तो टीकाकरण करवाना अच्छा हो सकता है।
