dharma sangrah

Sudeeksha Bhati: एक ‘बेटी की मौत’ की यही कीमत हम चुका सकते थे!

Updated: शुक्रवार, 11 सितम्बर 2020 (12:26 IST)
Photo: social media
सुदीक्षा भाटी की मौत गुम हो जाएगी, खो जाएगी। उसके मां-बाप अपनी बेटी के टूटे हुए सपनों को गोद में रखकर सुब‍कते रहेंगे जिंदगीभर।

एक गरीब बाप अपनी बेटी खो चुका है, उसके साथ उसके सारे सपने भी खो गए हैं। एक मां की जिंदगी में बेटी की मौत की टीस हमेशा के लिए रह जाएगी। एक लड़की अभी महज 20 साल की थी, उसने अभी जीने की शुरुआत भी नहीं की थी और वो चली गई, एक बेहद ही छि‍छोरी हरकत की वजह से।

सुदीक्षा भाटी गरीब परिवार से थी। जब उसने बारहवीं कक्षा में 98 प्रति‍शत हासि‍ल किए और उसे 4 करोड़ की स्‍कॉलरशि‍प लेकर वो पढ़ाई के लिए अमेरि‍का गई तो इस गरीब परिवार ने सपने देखने शुरू कर दिए।

लेकिन चाय बेचने वाले और ढाबे पर काम करने वाले दीक्षा के पिता और उसकी मां को शायद पता नहीं था कि गरीब परिवार को सपने देखने का हक नहीं है।

अपनी बेटी खो देने के बाद अब इस परिवार के बस में कुछ नहीं रहा। कुछ नहीं बचा, लेकिन अब जो होगा, वो मीडि‍या ट्रायल और राजनीति‍।

न्‍यूज चैनल पर कानून-व्‍यवस्‍था को लेकर बहस होगी। विपक्ष के नेता सत्‍ता पक्ष पर कानून-व्‍यवस्‍था का आरोप लगाएंगे। सत्‍ता पक्ष के कुछ लोग अपनी सफाई देंगे। पुलिस पर सवाल उठेंगे। पुलिस अपनी बात कहेगी। उत्‍तर प्रदेश में गुडांगर्दी और छेड़खानी के आंकड़े पेश किए जाएंगे। इतने साल में इतनी लड़कियों के साथ इतनी बार छेड़खानियां हुईं।

टीवी चैनल उसके सनसनीखेज फूटेज जुटाकर अपनी टीआरपी बढाएंगे, प्रबुद्धवर्ग दीक्षा को बहुत होनहार बताएंगे, ट्व‍िटर पर #justiceforsudeeksha  ट्रेंड करेगा, जैसा कि करने भी लगा है।

इन्‍हीं सब के बीच सुदीक्षा भाटी की मौत गुम हो जाएगी, खो जाएगी। उसके मां-बाप अपनी बेटी के टूटे हुए सपनों को गोद में रखकर सुब‍कते रहेंगे जिंदगीभर।

अगर कहीं कुछ नहीं बदलेगा तो वो है हमारी मानसिकता। हमारा सिस्‍टम। हमारा सलीका। जिंदगी के प्रति‍ हमारी क्रूरता, हमारी असंवेदनशीलता। मौत को अपने फायदे के लिए ग्‍लोरिफाई करने की हमारी आदत। हमने एक मौत की बहस में बहुत बढ़-चढ़कर हिस्‍सा ले लिया, टीवी पर बयान दे दि‍या, ट्व‍िटर पर एक रेस्‍ट इन पीस लिख दिया और हो गए अपनी जिम्‍मेदारी से बरी।

एक पिता, एक मां और एक गरीब परिवार जिसका सपना कूचल दिया गया है बेहद बेदर्दी के साथ उसे देने के लिए हमारे पास यही सब था, खूले आसमान में उड़ने के सपने देखने वाली एक बेटी की मौत की यही कीमत थी!
लेखक के बारे में
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्‍म में मास्‍टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्‍कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्‍ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्‍हें फिल्‍ड रिपोर्टिंग का अच्‍छा-खासा अनुभव है। उन्‍होंने अखबार.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस: जानिए इतिहास और इसका महत्व

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर निबंध: जानें भारत की आजादी का इतिहास और महत्व

तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

अगला लेख