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नमक, थोड़ा ही सही पर हर जगह जरूरी

Updated: शनिवार, 21 फ़रवरी 2026 (19:13 IST)
नमक— इसकी ज़रूरत हर जगह होती है। थोड़ा ही सही, पर यह ज़रूरी होता है। नमक और जायका भोजन में एक-दूसरे के पूरक हैं, वह भी संतुलित मात्रा में। न हो तो भी स्वाद फीका हो जाता है, ज़्यादा हो जाए तो स्वाद बिगड़ जाता है। दोनों ही स्थितियों में भोजन बेस्वाद हो जाता है।
 
वफादारी और गद्दारी का मानक भी है, नमक : नमक वफ़ादारी का प्रतीक है, तो गद्दारी का भी। नमक को लेकर वफ़ादारी की कसमें खाई जाती हैं— “मैंने आपका नमक खाया है, नमक हरामी नहीं करूंगा।” वफ़ादार लोग जान देकर भी नमक का कर्ज़ अदा करते हैं। और नमक खाकर नमकहरामी करने वालों को फिल्मों में अक्सर गोली खानी पड़ती है। व्यावहारिक जीवन में ऐसे लोग अविश्वसनीय माने जाते हैं; कोई उनसे रिश्ता रखना नहीं चाहता।
 
भ्रष्टाचार और संदेह की भी कसौटी है नमक : नमक भ्रष्टाचार का पैमाना भी है और संदेह का संकेत भी। एक बार नेशनल डेयरी डेवलपमेंट के दो विशेषज्ञों से गोरखपुर में मुलाक़ात हुई। बतौर रिपोर्टर मैंने उनसे पूछा— पराग और अमूल की स्थापना लगभग एक ही समय हुई थी, फिर इतना अंतर क्यों? उनका संक्षिप्त और सारगर्भित उत्तर था— “जहां अमूल की स्थापना हुई वहां दाल में नमक डाला जाता है, आपके यहां नमक में दाल पकाई जाती है।” इस जवाब के बाद मेरा अगला सवाल पूछने की हिम्मत नहीं हुई। रही बात संशय की— “दाल में कुछ काला है” तो यह हल्के संदेह का संकेत है, लेकिन जब पूरी दाल ही काली लगे, तो समझिए संदेह पुख्ता हो चुका है।
 
जंगे आजादी में भी रही है नमक की निर्णायक भूमिका : देश की आज़ादी की लड़ाई में भी मुट्ठी भर नमक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंग्रेजों के नमक कानून को तोड़ने के लिए 1930 में महात्मा गांधी की अगुआई में निकला गया दांडी मार्केट ने स्वतंत्रता आंदोलन को निर्णायक मोड़ दिया। नमकीन होना सुंदरता का विशेषण भी है। नमक को केंद्र में रखकर बॉलीवुड में कई चर्चित फिल्में बनीं, जिनमें "नमक हराम" और "नमक हलाल" प्रमुख हैं।
 
नमक रोग कारक भी है और दवा भी : नमक दवा भी है और रोग बढ़ाने वाला भी। यदि किसी को उच्च रक्तचाप है, तो चिकित्सक कम नमक खाने की सलाह देते हैं। वहीं सोडियम की कमी या डिहाइड्रेशन की स्थिति में नमक-चीनी का घोल जीवनरक्षक साबित होता है। फिलहाल नमक पर इतना ही। नमक भी रहेगा और उससे जुड़ी कहावतें भी। बात आगे बढ़ेगी तो फिर नमक से मुलाकात होगी। गर्मी आ रही है— पसीना होगा। शरीर में पानी के साथ नमक का संतुलन बनाए रखें। इससे डिहाइड्रेशन से काफी हद तक बचाव संभव है।
लेखक के बारे में
गिरीश पांडेय
गिरीश पांडेय को विभिन्न मीडिया संस्थानों में तीन दशक से भी ज्यादा समय तक कार्य करने का अनुभव है। राजनीतिक, सामाजिक एवं समसामयिक मुद्दों पर इनकी गहरी पकड़ है। .... और पढ़ें

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