बापू : एक मं‍त्र अहिंसा का

गाँधी जयंती विशेष

डॉ. बी.एस. भंडारी
सच तो यह है कि गाँधीजी को सही-सही कोई नहीं पहचान सका, जो पहचान सकें थे, वे अब रहे नहीं। जब वे थे तब वे कुशलता से व्यक्त नहीं कर पाए कि गाँधी का चमत्कारिक स्वरूप आखिर है क्या? गाँधी हर पल, प्रतिपल याद करने वाला मंत्र है जिसे जन-जन तक असली रूप में पहुँचाना होगा।



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