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गांधीजी की सफलता के मंत्र

सोमवार,अक्टूबर 3, 2011
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सत्य, अहिंसा और भाईचारे का संदेश देते हुए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले बापू ने जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर को भी अहिंसा का महत्व समझाया था और उनसे युद्ध का रास्ता छोड़ने का आग्रह किया था। महात्मा गाँ धी कम्प्लीट वर्क्‍स.. वल्यूम 70 में प्रकाशित ...
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गाँधीजी की हत्या के प्रत्यक्षदर्शी रहे 87 वर्षीय कृष्ण देव मदान के अनुसार उन्हें शाम 5:17 बजे गोली मारी गई और आकाशवाणी ने छह बजे के अपने बुलेटिन से 10 मिनट पहले उनके निधन की खबर प्रसारित की। खबर को आकाशवाणी तक पहुँचाने में भी मदान की विशेष भूमिका
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महात्मा गाँधी के आश्रम में एक प्रसिद्ध संन्यासी आए। आश्रम के वातावरण, बापू के कार्यक्रम और विचारों से वे साधु बड़े प्रसन्न हुए और वहाँ ठहर गए। उनको आश्रम में मेहमान की तरह रखा गया। एक दिन साधु बापू से मिले और प्रार्थना करते हुए बोले- 'महात्मा ...
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आज भी जिंदा है गाँधी

शुक्रवार,जनवरी 28, 2011
एक मिथक बीसवी शताब्दी में 'सत्य के प्रयोग' अथवा 'आत्मकथा' के नाम से मोहनदास करमचंद गाँधी (1869-1948) ने- सत्य, अहिंसा, ईश्वर का मर्म समझने-समझाने के विचार से किया था। उसका प्रकाशन भले ही 1925 में हुआ, पर उसमें निहित बुनियादी सिद्धांतों पर वे अपने ...
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गाँधीवाद पर विवाद क्यों?

शुक्रवार,जनवरी 28, 2011
ओशो द्वारा गाँधी पर दिए प्रवचन को पढ़कर कुछ लोगों की धारणा यह है कि गाँधीवाद को नहीं अपनाया जा सकता क्योंकि यह पीछे ले जाने वाला दर्शन है जबकि हमें महात्मा गाँधी से प्रेम है। उनके योगदान को हम सलाम करते हैं। जहाँ तक अहिंसा के दर्शन की बात है तो यह ...
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30 को बच जाते बापू...

शुक्रवार,जनवरी 28, 2011
अहिंसा के सबसे बड़े प्रवर्तक महात्मा गाँधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को कर दी गई थी, लेकिन उनकी हत्या की साजिश रचने वालों ने इससे कुछ दिन पहले भी 20 जनवरी को एक प्रार्थना सभा में बापू को मारने का प्रयास किया था हालाँकि वे इसमें असफल रहे।
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उड़ीसा में है गाँधी-मंदिर

शुक्रवार,जनवरी 28, 2011
उड़ीसा के संबलपुर के भटारा गाँव के ग्रामीणों ने एक मंदिर का निर्माण करके महात्मा गाँधी की छह फीट उँची काँसे की मूर्ति लगवाई है। वहाँ के ग्रामीण इस मूर्ति की हर वर्ष गाँधी जयंती, स्वतंत्रता दिवस और महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि शहीद दिवस पर पूजा करते ...
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महात्मा गाँधी को उनके जन्मस्थान पर शहीद दिवस के अवसर पर अलग तरह से श्रद्धांजलि दी जाती है। यहाँ देश भर के कलाकार उनकी पुण्यतिथि पर उनकी जीवनी और उनके कार्यों को बालू की प्रतिमाओं एवं आकृतियों से जीवंत करते हैं।
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