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भोपाल के मास्टर प्लान ड्रफ्ट-2047 का विरोध, किसानों के व्यापारी और रहवासियों ने सड़क पर उतरकर जताया विरोध

Bhopal Master Plan Draft 2047
भोपाल के प्रस्तावित भोपाल मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट को लेकर विरोध बढ़ता ही जा रहा है। मास्टर प्लान को लेकर किसानों से लेकर रहवासियों तक ने अपना विरोध तेज कर दिया है। गुरुवार के विरोध प्रदर्शन के बाद शुक्रवार को व्यापारियों के साथ भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने भी टीएनसीपी दफ्तर पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया।

मास्टर प्लान के विरोध में सड़क पर उतरे किसान- भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर सबसे अधिक विरोध भोपाल ग्रामीण के किसानों में देखा जा रहा है। किसानों का आरोप है कि मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में भोपाल ग्रामीण के 66 गांवों की निजी कृषि भूमि को पहली बार रिवरफ्रंट,फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणी में शामिल कर दिया गया है, जिससे हजारों किसान भूमिहीन हो जाएंगे।

किसानों के इस विरोध प्रदर्शन में अब भारतीय किसान संघ की भी एंट्री हो गई है। भारतीय किसान संघ के बैनर तले शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान टीएंडसीपी के दफ्तर पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। इससे पहले गुरुवार को 66 गांवों के किसानों ने मुगालिया छाप गांव से टीएंडसीपी दफ्तर तक पदयात्रा निकालने की कोशिश की। किसानों को रातीबड़ चौराहे पर पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकार रोक लिया और किसानों का ज्ञापन लिया।

मास्टर प्लान पर किसानों की प्रमुख आपत्ति-भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान को लेकर किसानों ने मुख्य रूप से दो आपत्तियां दर्ज कराई हैं। किसानों ने भोजताल के नाम पर लैंडयूज बदलने पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी जमीन पर कृषि कार्य कर रहे हैं। 1995 के मास्टर प्लान और 2031 के मास्टर प्लान ड्राफ्ट में भी उनकी जमीन का लैंडयूज कृषि था। अब तालाब संरक्षण के नाम पर कृषि जमीन का लैंडयूज बदलकर तालाब संरक्षण में लिया जा रहा है। किसानों ने मांग की है कि BIZ1, BIZ2 (भोजताल संरक्षण जोन 1, जोन 2) को विलोपित किया जाए और उनकी जमीन का लैंडयूज कृषि ही रखा जाए, ताकि वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।

इसके साथ किसानों ने मास्टर प्लान पर आपत्ति दर्ज करते हुए आरोप लगाया कि 2031 के मास्टर प्लान पर आपत्ति के दौरान सरकार ने आश्वासन दिया था कि ग्राम पंचायतों से सहमति लेकर ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। गांव के विकास में ग्राम सभा का बड़ा योगदान होता है। उन्होंने मांग की है कि 66 ग्राम पंचायतों में ग्रामसभा कराकर सहमति ली जाए।

भोपाल के कई कॉलोनी के रहवासी भी मास्टर प्लान के विरोध में- भोपाल मास्टर प्लान 2047 के विरोध में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में रहवासी टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) कार्यालय पहुंचे और हजारों आपत्तियां दर्ज कराईं। रहवासियों ने भोपाल के ख़त्म होते तालाबों, जंगलों, वन्यजीवों, पर्यावरण और सुनियोजित आवासीय क्षेत्रों के संरक्षण पर चिंता जताते हुए अवैध भू-उपयोग और अनधिकृत निर्माणों को नियमित करने की संभावनाओं का विरोध किया।रहवासियों ने आवासीय क्षेत्र के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण पर रोक लगाने तथा ड्राफ्ट में मौजूद विरोधाभासों को दूर करने की मांग की है।

कई कॉलोनियों के रहवासियों ने जताया विरोध- भोपाल मास्टर प्लान के ड्राप्ट का कई कॉलोनी के रहवासियों ने विरोध किया है। अरेरा कॉलोनी, गौतम नगर, रोहित नगर,रचना नगर, बावडिया, साकेत नगर, भेल, कोटरा, लालघाटी शक्ति नगर, शाहपुरा विकास कुंज,कोलार रोड, नेहरु नगर, प्रियदर्शनी अधिष्ठान,गुलमोहर, डीके कोटेज, ग्रीन सिटी सोसाइटी, रामशरण सोसाइटी आधी के रहवासी जिसमे प्रमुख रूप से पूर्व आईएएस कविन्द्र कियावत,अरुण गुर्टू,पवन जैन,याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी एवं लवनीश भाटी, पूर्णेंदु शुक्ला सहित अन्य लोगों ने टीएनसीपी कार्यालय पहुंचकर आपत्ति दर्ज कराई ।

मास्टर प्लान पर क्या हैं आपत्ति?- याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि भोपाल विकास योजना 2047 के बिंदु क्रमांक 15:38 में आवासीय परिसर में संचालित अवैध व्यवसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के पूर्णतः विपरीत है। आदेश में स्पष्ट उल्लेखित है कि आवासीय अनुमति प्राप्त भवनो में संचालित व्ययावसायिक गतिविधियों को सील किया जाए तथा जो निर्माण स्वीकृत मानचित्रों के विपरीत है उसे तोड़ा जाए।

इस प्रकार के अवैध निर्माण को किसी भी स्वरूप में नियमित नहीं किया जा सकता है, ये न्यायलय के विरोधाभासी और कानून का उलंघन करने वाले भूमाफियाओ को प्रोत्सहित करने वाला प्रतीत होता है| अरेरा कॉलोनी के आवासीय भूखंडों पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने तथा मार्केट स्ट्रीट जैसे प्रावधान आवासीय शांति, यातायात, पार्किंग, हरियाली और नागरिकों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।

रहवासियों ने भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुरूप फुटपाथ, पार्किंग और आवश्यक सड़क सुविधाएं विकसित करने, स्वीकृत अभिन्यास के अनुसार पार्कों एवं खुले स्थानों को सुरक्षित रखने तथा बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र, हरित क्षेत्रों और टाइगर मूवमेंट क्षेत्र में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले निर्माण संबंधी प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग भी उठाई है। समिति ने कहा कि मास्टर प्लान शहर के सुनियोजित विकास का आधार होना चाहिए, न कि अवैध निर्माणों को वैधता देने या प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने का माध्यम। नागरिक सुविधाओं के नाम पर पर्यावरण, आवासीय क्षेत्रों और नागरिक हितों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लेखक के बारे में
भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें
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