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Lunar Eclipse 2026: साल के दूसरे चंद्र ग्रहण की 5 बड़ी और रोचक बातें

Updated: सोमवार, 1 जून 2026 (13:02 IST)
Partial Lunar Eclipse: वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को (एक पूर्ण चंद्र ग्रहण के रूप में) लग चुका है। वर्ष 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 27-28 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है। ग्रहण सुबह 06:53 से प्रारंभ होगा और सूतक काल 9 घंटे पहले प्रारंभ होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा। राहु और शनि के प्रभाव वाली इस राशि में ग्रहण लगने से मानसिक और आर्थिक उथल-पुथल के संकेत मिलते हैं। चलिए इस आगामी चंद्र ग्रहण से जुड़ी 5 खास बातें जानते हैं।
 

1. यह एक "गहरे स्तर" का आंशिक ग्रहण है (Deep Partial Eclipse)

भले ही यह पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) नहीं है, लेकिन यह आंशिक ग्रहणों में बेहद खास है। इस ग्रहण के दौरान पृथ्वी की मुख्य घनी छाया (Umbra) चंद्रमा के लगभग 96.2% हिस्से को ढक लेगी। इसका मतलब है कि चंद्रमा का केवल एक बहुत छोटा सा कोना ही चमकीला बचेगा, बाकी पूरा हिस्सा अंधकार में डूब जाएगा।
 

2. 'ब्लड मून' जैसा अद्भुत नजारा

आमतौर पर आंशिक चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का रंग सफेद-मटमैला या हल्का काला दिखता है। लेकिन इस बार 96% से अधिक हिस्सा ढकने के कारण, अधिकतम ग्रहण के समय चंद्रमा पूरी तरह काला होने के बजाय हल्का तांबे जैसा या गहरा लाल (Coppery Red) दिखाई दे सकता है। यह नजारा लगभग 'ब्लड मून' जैसा ही अद्भुत होगा।
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3. आकार में थोड़ा छोटा दिखेगा चंद्रमा (Micro Moon इफेक्ट)

यह चंद्र ग्रहण तब लग रहा है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी कक्षा में काफी दूरी (Apogee के करीब) पर होगा। पृथ्वी से दूर होने के कारण आसमान में चंद्रमा का आकार आम पूर्णिमा के मुकाबले थोड़ा छोटा दिखाई देगा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'माइक्रो मून' (Micro Moon) भी कहा जाता है।
 

4. ग्रहण की कुल अवधि (Duration)

यह ग्रहण अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए काफी लंबा होने वाला है। अगर इसके सभी चरणों (उपछाया और मुख्य छाया दोनों) को मिला दिया जाए, तो यह पूरा घटनाक्रम लगभग 5 घंटे 38 मिनट तक चलेगा। वहीं, मुख्य आंशिक चरण (जब चांद साफ तौर पर कटा हुआ या लाल दिखेगा) लगभग 3 घंटे 18 मिनट का होगा। स्थानीय समयानुसार अवधि में 5 से 10 मिनट की घटबढ़ रह सकती है।
 

5. दृश्यता: कहां दिखेगा और क्या भारत में सूतक लगेगा?

कहां दिखाई देगा: यह चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका (North and South America) में शुरू से अंत तक पूरा दिखाई देगा। इसके अलावा यूरोप, अफ्रीका और प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में भी इसे देखा जा सकेगा।
 
भारत में स्थिति: यह ग्रहण भारतीय समयानुसार (IST) 28 अगस्त 2026 को सुबह लगभग 6:53 बजे (जब भारत में सूरज उग चुका होगा और चंद्रमा अस्त हो चुका होगा) अपने चरम पर होगा। इसलिए यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में दृश्यमान न होने के कारण यहाँ इसका कोई धार्मिक प्रभाव या सूतक काल मान्य नहीं होगा।
 

सावधानी के उपाय

ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए ज्योतिष शास्त्र में ये उपाय बताए गए हैं:
मंत्र जाप: ग्रहण काल के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' या चंद्रमा के बीज मंत्र 'ॐ सों सोमाय नमः' का जाप करें।
दान: ग्रहण समाप्त होने के बाद सफेद वस्तुओं जैसे दूध, दही, चावल या सफेद वस्त्र का दान गरीबों को करें।
हनुमान चालीसा: नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत प्रभावी रहता है।
 
 
  
 

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