चुनाव प्रचार का समय कम करने से ममता नाराज, मोदी-शाह के निर्देश पर हुआ यह फैसला

पुनः संशोधित गुरुवार, 16 मई 2019 (07:30 IST)
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने 19 मई को लोकसभा चुनाव के सातवें एवं अंतिम चरण के लिए प्रचार के समय को कम करने और गृह सचिव अत्रि भट्टाचार्य और एडीजी/सीआईडी राजीव कुमार को हटाने के के निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष के निर्देश पर उठाया गया है।
ममता बनर्जी ने उप चुनाव आयुक्त सुदीप जैन पर निशाना साधते हुए कहा कि गलत काम करने वाले को सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारियों (अजय नाइक और विवेक दुबे) को पूरा अधिकार दे दिया गया और राज्य के आईएएस और अधिकारियों को मूकदर्शक बना दिया गया है। बनर्जी ने दावा किया कि इन दो सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति गैरकानूनी है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, मोदी और अमित शाह को अब लोग मुंहतोड़ जवाब देंगे। उन्हें चुनाव में हराया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग के इस कदम से बंगाल के लोगों का अपमान हुआ है। उन्होंने शुक्रवार को राज्यव्यापी विरोध- प्रदर्शन की घोषणा की।

बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने यह फैसला मोदी को लाभ पहुंचाने और अन्य को पश्चिम बंगाल में नौ सीटों के लिए होने वाले अंतिम चरण के चुनाव के मद्देनजर लोगों तक पहुंचने से रोकने के लिए किया है। मोदी की गुरुवार को बंगाल में दौ रैलियां हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि शाह के रोडशो के दौरान हुई हिंसा पूर्व-नियोजित थी। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि मोदी और शाह के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने दावा किया कि उप चुनाव आयुक्त ने यहां आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को धमकाया है।

ट्विटर से एक्जिट पोल संबंधी पोस्ट हटाने को कहा : चुनाव आयोग ने ट्विटर को एक्जिट पोल संबंधी एक ट्वीट को संभवत: हटाने को कहा है। इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बुधवार को बताया कि चुनाव आयोग ने यह कदम एक शिकायत मिलने के बाद उठाया है। साथ ही बताया कि यूजर ने बाद में ट्वीट हटा लिया। हालांकि सूत्रों ने शिकायत के संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं दी।
मीडिया संस्थानों को भी नोटिस : इससे एक दिन पहले ही चुनाव आयोग ने तीन मीडिया
संस्थानों

को लोकसभा चुनावों के नतीजों का अनुमान जताने वाले सर्वेक्षण का कथित तौर पर प्रकाशन करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

 

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