भोपाल में इन 5 मुद्दों पर वोटर करेगा उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला

वोटिंग से पहले वेबदुनिया की ग्राउंड रिपोर्ट

विकास सिंह| पुनः संशोधित शनिवार, 11 मई 2019 (14:18 IST)
में देश की सबसे हॉट सीट बनी लोकसभा सीट पर वोटिंग से ठीक पहले सबकी निगाहें वोटरों पर लगी हैं। हर कोई ये जानना चाह रहा है कि भोपाल के वोटर के मन में क्या है। वो किन मुद्दों पर किसके पक्ष में अपना फैसला सुनाने वाला है। ऐसे में वेबदुनिया ने भोपाल के अलग अलग इलाकों में लोगों से बात कर ये जानने की कोशिश की वो किन मुद्दों पर अपना वोट डालेंगे।
वेबदुनिया ने भोपाल के हर वर्ग और समुदाय के वोटरों की नब्ज टटोलकर ये जानने की कोशिश की कि वोटिंग से ठीक पहले वोटरों के मन में क्या चल रहा है। ऐसे में पांच मुद्दे पर जिन पर भोपाल का वोटर अपना फैसला सुनाने जा रहा है, वो इस प्रकार हैं...

1. मोदी का चेहरा : भले ही पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भोपाल लोकसभा सीट पर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और दिग्विजय सिंह के नाम की चर्चा रही हो, लेकिन अब के ठीक पहले मोदी का चेहरा ही हावी होता दिख रहा है। वेबदुनिया से बातचीत में अधिकांश वोटरों ने कहा कि मोदी का चेहरा उनके लिए काफी अहम है और वो मोदी के चेहरे को देखकर वोट कर रहे हैं।
अधिकांश वोटरों ने कहा कि वे केंद्र में सरकार बनाने के लिए वोट कर रहे हैं। इसलिए चेहरा भी मोदी बनाम राहुल का ही है। केंद्र सरकार की योजना और कांग्रेस के घोषणा पत्र में किए गए न्याय के वादे का असर भी भोपाल के वोटरों में देखने को मिल रहा है।

2. राष्ट्रवाद : भोपाल लोकसभा चुनाव में जीत-हार के फैसले में राष्ट्रवाद का मुद्दा एक बड़ी भूमिका अदा करेगा। पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हुई एयर स्ट्राइक का असर भोपाल के वोटरों पर साफ दिखाई दे रहा है। युवा वोटर राष्ट्र की सुरक्षा को लेकर काफी मुखर नजर आया।
3. ध्रुवीकरण : भोपाल लोकसभा चुनाव में जीत-हार के फैसले में वोटरों का ध्रुवीकरण फैक्टर सबसे ज्यादा हावी है। लोगों से बातचीत में इस बात के साफ संकेत देखने को मिले कि पूरा चुनाव ध्रुवीकरण पर केंद्रित हो गया है। चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने पक्ष में वोटरों का ध्रुवीकरण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

4. उम्मीदवारों के चेहरे का मुद्दा : भोपाल लोकसभा चुनाव में चेहरे की लड़ाई भी देखने मिल रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ओर से ही ऐसे चेहरे चुनाव मैदान में उतारे गए जो वोटरों के बीच काफी चर्चा के केंद्र में रहे। ऐसे में अब जब मतदाता अपना फैसला सुनाने वाला है तो चेहरा एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
5. विकास का मुद्दा : चुनाव में जो मुद्दा सबसे पहले होना चाहिए वो विकास का मुद्दा भोपाल में इस बार सबसे निचले पायदान पर दिख रहा है। वेबदुनिया ने जब लोगों से बात की तो उनका कहना था कि भोपाल चुनाव में विकास उतना अहम मुद्दा नहीं है। लोग कहते हैं कि उनके लिए विकास से अधिक राष्ट्र की सुरक्षा और राष्ट्र का गौरव अधिक महत्वपूर्ण है।

 

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