ग्राउंड रिपोर्ट : गौतम गंभीर पूर्वी दिल्ली सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे

Last Updated: गुरुवार, 9 मई 2019 (16:59 IST)
नई दिल्ली। क्रिकेटर से राजनीति में उतरे के कंधों पर पूर्वी दिल्ली की प्रतिष्ठित लोकसभा सीट त्रिकोणीय मुकाबले में जीतकर एक बार फिर भाजपा की झोली में डालने की बड़ी जिम्मेदारी है।



पिछले आम चुनाव में दिल्ली की सातों सीटों पर भाजपा ने कांग्रेस को पटखनी दी थी और पहली बार चुनाव मैदान में उतरे महेश गिरी ने दो बार के सांसद रहे पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित को पटखनी दी थी। वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव राजधानी का पहला आम चुनाव था जब यहां आम आदमी पार्टी की मौजूदगी में त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था। नवोदित आप पार्टी 2014 में दिल्ली की सभी सातों संसदीय सीटों पर कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए दूसरे स्थान पर रही थी।

इस बार के आम चुनाव में पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट की खासियत यह है कि रेस में शामिल सभी तीनों दलों ने अपने उम्मीदवार बदले हैं। भाजपा ने मौजूदा सांसद गिरी का टिकट काटकर गंभीर को चुनावी बैटिंग के लिए उतारा है तो कांग्रेस ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और शीला सरकार में मंत्री रहे युवा और तेजतर्रार नेता अरविंदरसिंह लवली को टिकट दिया है। आप ने पिछले चुनाव में उम्मीदवार रहे महात्मा गांधी के पौत्र राजमोहन गांधी की जगह आतिशी मार्लिना को मैदान में उतारा है।

पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र में दिल्ली विधानसभा की 70 में से 10 विधानसभा सीटें गांधी नगर, कृष्णा नगर, विश्वास नगर, शाहदरा, पटपड़गंज, लक्ष्मीनगर, कोंडली, त्रिलोकपुरी, ओखला और जंगपुरा आती है। विधानसभा के पिछले चुनाव में दिल्ली में इतिहास रचने वाली आप ने इनमें से नौ सीटों पर विजय हासिल की थी। इस संसदीय क्षेत्र की केवल विश्वास नगर विधानसभा सीट भाजपा की झोली में आई थी और ओमप्रकाश शर्मा विजयी हुए थे। गांधी नगर सीट से आप के टिकट पर विधायक चुने गए अनिल बाजपेयी ने हाल ही में पार्टी का दामन छोड़कर भाजपा का पल्ला पकड़ लिया है।

क्रिकेट के मैदान में ओपनिंग बल्लेबाजी करने वाले गंभीर की राजनीति में भी यह शुरुआती पारी है और युवा होने के साथ मोदी के नाम से उत्साहित पार्टी कार्यकर्ताओं की पिच पर वह जीतने के लिए उतरे हैं। अपनी उम्मीदवारी को लेकर आप की तरफ से उठाए गए सवालों का गंभीर ने करार जवाब दिया है।


 

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