suvichar

आप अपना पासवर्ड कहां रखते हैं?

Written By DW
Updated: मंगलवार, 7 सितम्बर 2021 (17:19 IST)
रिपोर्ट : आमिर अंसारी

एटीएम पिन, बैंक खाता नंबर, डेबिट कार्ड या फिर क्रेडिट कार्ड डिटेल्स हो या आधार और पैन कार्ड जैसी संवेदनशील निजी जानकरी, भारतीय बेहद लापरवाह तरीके से इन्हें रखते हैं। एक सर्वे में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
 
33 प्रतिशत भारतीय रखते हैं असुरक्षित तरीके से डेटा
 
लोकल सर्कल के सर्वे में यह पता चला है कि करीब 33 प्रतिशत भारतीय संवेदनशील डेटा असुरक्षित तरीके से ई-मेल या कम्प्यूटर में रखते हैं।
 
ई-मेल और फोन में रखते हैं पासवर्ड
 
सर्वे में शामिल लोगों ने बताया कि वे संवेदनशील डेटा जैसे कि कम्प्यूटर पासवर्ड, बैंक अकाउंट से जुड़ी जानकारी, क्रेडिट और डेबिट कार्ड के साथ ही साथ आधार और पैन कार्ड जैसी निजी जानकारी भी ई-मेल और फोन के कॉन्टैक्ट लिस्ट में रखते हैं। 11 फीसदी लोग फोन कॉन्टैक्ट लिस्ट में ऐसी जानकारी रखते हैं।
 
याद भी करते हैं और लिखते भी हैं
 
लोकल सर्कल ने देश के 393 जिलों के 24,000 लोगों से प्रतिक्रिया ली, सर्वे में शामिल 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपनी जानकारियां कागज पर लिखते हैं, वहीं 21 फीसदी लोगों ने कहा कि वे अहम जानकारियों को याद कर लेते हैं।
 
डेबिट कार्ड पिन साझा करते हैं
 
लोकल सर्कल के सर्वे में शामिल 29 फीसदी लोगों ने कहा कि वे अपने डेबिट कार्ड पिन को अपने परिवार के सदस्यों के साथ साझा करते हैं। वहीं सर्वे में शामिल चार फीसदी लोगों ने कहा कि वे पिन को घरेलू कर्मचारी या दफ्तर के कर्मचारी के साथ साझा करते हैं।
 
बड़ा वर्ग साझा नहीं करता एटीएम पिन
 
सर्वे में शामिल एक बड़ा वर्ग यानी 65 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्होंने एटीएम और डेबिट कार्ड पिन को किसी के साथ साझा नहीं किया। दो फीसदी लोगों ने ही अपने दोस्तों के साथ डेबिट कार्ड पिन साझा किया।
 
फोन में अहम जानकारी
 
कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बैंक खातों से जुड़ी जानकारी, आधार या पैन कार्ड जैसी जानकारी फोन में रखते हैं। सर्वे में शामिल सात फीसदी लोगों ने इसको माना है। 15 प्रतिशत ने कहा कि उनकी संवेदनशील जानकारियां ई-मेल या कम्प्यूटर में है।
 
डेटा के बारे में पता नहीं
 
इस सर्वे में शामिल सात फीसदी लोगों ने कहा है कि उन्हें नहीं मालूम है कि उनका डेटा कहां हो सकता है। मतलब उन्हें अपने डेटा के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं है।
 
बढ़ रहे साइबर अपराध
 
ओटीपी, सीवीवी, एटीएम, क्रेडिट या डेबिट कार्ड क्लोनिंग कर अपराधी वित्तीय अपराध को अंजाम दे रहे हैं। ई-मेल के जरिए भी लोगों को निशाना बनाया जाता है और संवेदनशील जानकारियों चुराई जाती हैं।
 
डेटा सुरक्षा में जागरूकता की कमी
 
लोकल सर्कल का कहना है कि देश के लोगों में अहम डेटा के संरक्षण को लेकर जागरूकता की कमी है। कई ऐप ऐसे हैं जो कॉन्टैक्ट लिस्ट की पहुंच की इजाजत मांगते हैं ऐसे में डेटा के लीक होने का खतरा अधिक है। लोकल सर्कल के मुताबिक वह इन नतीजों को सरकार और आरबीआई के साथ साझा करेगा ताकि वित्तीय साक्षरता की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सके।
लेखक के बारे में
DW
डॉयचे वेले (Deutsche Welle), जिसे आमतौर पर DW के नाम से जाना जाता है, जर्मनी का अंतरराष्ट्रीय प्रसारक है। यह जर्मनी की संघीय सरकार के वित्तपोषण से स्वतंत्र रूप से काम करता है और हिन्दी सहित 32 भाषाओं में निष्पक्ष समाचार, विश्लेषण और मीडिया विकास का कार्य करता है। वेबदुनिया.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

क्या मस्क बनेंगे दुनिया के पहले खरबपति?

भारत में अब भी कैसे जारी है हर दिन 16 महिलाओं की दहेज हत्या?

नार्वे में पत्रकारिता या पब्लिसिटी स्टंट?

बंगाल में राजनीतिक हिंसा रोकना भाजपा सरकार की सबसे बड़ी चुनौती

ईरान युद्ध: कितनी असरदार है भारत की बहु-पक्षीय रणनीति?

सभी देखें

मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

Top News 3 September: 12 राज्यों में बारिश का अलर्ट, ईरान युद्ध पर ट्रंप का बड़ा बयान

पाकिस्तान में 100 साल पुराने हिन्दू मंदिर पर बवाल, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति, जानें मंदिर गिराने पर क्या बोली सरकार

अगला लेख