ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खियों पर लगाया गया 'लॉकडाउन'

DW| पुनः संशोधित रविवार, 3 जुलाई 2022 (07:46 IST)
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ऑस्ट्रेलिया में करोड़ों मधुमक्खियों को तालाबंद कर दिया गया है और हजारों का कत्ल किया जा रहा है क्योंकि एक घातक पैरासाइट का पता चला है जो मधुक्खियों के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता है।

डिस्ट्रक्टर नाम का यह पैरासाइट सिडनी के नजदीक एक बंदरगाह पर पाया गया था। एक हफ्ते बाद यह सौ किलोमीटर दूर मधुमक्खियों के एक छत्ते में पाया गया जिसके बाद पूरे देश में अलर्ट जारी कर दिया गया।

वारोआ डिस्ट्रक्टर के फैलने से शहद ही नहीं, मधुमक्खियों से जुड़े अन्य उत्पादों के दाम बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खी पालन करोड़ों डॉलर का उद्योग है और हजारों लोग इसमें काम करते हैं। जिन मधुमक्खियों को ‘लॉकडाउन' में रखा गया है, उन छत्तों के मालिक अगली सूचना मिलने तक छत्तों में किसी तरह का बदलाव नहीं कर पाएंगे।
ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में हजारों मधुमक्खियों को नष्ट किया जा चुका है और मधुमक्खीपालकों से सावधान रहने को कहा गया है। पालकों का अनुमान है कि अगर वारोआ फैलता है तो सिर्फ शहद उद्योग को 7 करोड़ डॉलर यानी करीब चार अरब रुपये का नुकसान होगा।

इसके अलावा फूलों और फलों की खेती को भी भारी नुकसान होने की आशंका है क्योंकि देश का कम से कम एक तिहाई खाद्य उत्पादन मधुमक्खियों द्वारा किए जाने वाले वाले परागन पर निर्भर करता है।
वारोआ डिस्ट्रक्टर को दुनियाभर में मधुमक्खियों के लिए सबसे घातक खतरा माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया ही एक ऐसा महाद्वीप था जो इस पैरासाइट से मुक्त था। ये पैरासाइट तिल के आकार के होते हैं और मधुमक्खियों की कॉलोनियों का समूल नाश कर देते हैं।

वारोआ की दो प्रजातियां होती हैं। एक है वारोआ डिस्ट्रक्टर और दूसरी है वारोओ जैकबसोनी। ये दोनों ही मधुमक्खियों का खून चूसते हैं। इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जाती है और ये पूरी कॉलोनी में फैल जाते हैं।
कैसे आया वारोआ?
अब तक यह पैरासाइट एशिया, यूरोप, अमेरिका और न्यूजीलैंड में मिल चुका था। यूरोप में इस पैरासाइट ने भारी नुकसान पहुंचाया है। जहां भी यह पाया गया, वहीं पूरी की पूरी कॉलोनी नष्ट हो गईं। इसका असर इतना खतरनाक होता है कि यह जिस मधुमक्खी से चिपट जाता है उसे तो कमजोर करता ही है उस कॉलोनी में नई मधुमक्खियां भी अपंग पैदा होती हैं।

वारोआ को ऑस्ट्रेलिया के बायोसिक्यॉरिटी एक्ट 2014 में शामिल किया गया है। यानी ऐसा कोई भी उत्पाद जिसमें वारोआ हो सकता है, ऑस्ट्रेलिया में लाना प्रतिबंधित है। इसलिए अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि वारोआ ऑस्ट्रेलिया के भीतर कैसे पहुंचा।
ऑस्ट्रेलिया के कृषि मंत्री डगलैड सॉन्‍डर्स ने बताया कि अब तक छह सौ छत्तों को नष्ट किया जा चुका है जिनमें से हरेक में दस से तीस हजार के बीच मधुमक्खियां थीं। उन्होंने कहा, "यह संख्या और बढ़ेगी। हमें अब तक आठ ऐसे परिसरों का पता चला है जहां संक्रमण हो चुका है। आने वाले दिनों में नष्ट करने के ये आदेश जारी रहेंगे।" उन्होंने कहा कि सरकार एक रसायन के छिड़काव के बारे में भी सोच रही है जो वारोआ के प्रसार को धीमा कर सकता है। उन्होंने कहा कि छत्तों को जलाकर नष्ट करने से पहले मधुमक्खियों को पेट्रोल या गैस से मारा जा रहा है।
रिपोर्टः विवेक कुमार



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