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चीन को बेचैन करती है तिब्बती भाषा

Updated: सोमवार, 8 जनवरी 2018 (12:30 IST)
खुद को विश्व महाशक्ति की तरह पेश करता चीन छोटी छोटी बातों से डरता है। तिब्बती भाषा को बचाने की कोशिश करते एक शख्स की गिरफ्तारी से भी यह बात साबित हो रही है।
 
चीन में तिब्बती भाषा कैसे बचाया जाए? ताशी वांगचुक इसी जद्दोजेहद में जुटे थे। पूर्वोत्तर चीन के तिब्बती इलाके से आने वाले ताशी अपनी मातृभाषा को बचाने पर काम करने लगे। वह अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा बने। डॉक्यूमेंट्री टीम के साथ ताशी अपने प्रांत किंघाई से बीजिंग तक गए।
 
न्यूयॉर्क टाइम्स में खबर छपने और डॉक्यूमेंट्री प्रसारित होने के ही कुछ समय बाद जनवरी 2016 में ताशी को हिरासत में ले लिया गया। अब दो साल बाद उनका कोर्ट ट्रायल शुरू हुआ है।
 
अभियोजन पक्ष ने ताशी पर अलगाववाद भड़काने का आरोप लगाया है। अपने ही शहर युशु की अदालत में शुरू हुए मुकदमे में अगर ताशी दोषी साबित हुए तो उन्हें कम से कम पांच साल तक की जेल हो सकती है। ताशी के वकील लियांग शियाओजून के मुताबिक अभियोजन पक्ष ताशी को पांच साल से भी ज्यादा की जेल करवाना चाहता है।
 
ताशी ने अदालत में अलगाववाद भड़काने के आरोपों को खारिज किया है। उनके वकील लियांग कहते हैं, "वह अलगाववाद भड़काने पर विश्वास नहीं करते हैं। वह सिर्फ तिब्बती भाषा की पढ़ाई को मजबूत करना चाहते हैं।"
 
अभियोजन पक्ष ने डॉक्यूमेंट्री को ताशी के खिलाफ कोर्ट में अहम सबूत के तौर पर पेश किया है। डॉक्यूमेंट्री में एक बार ताशी यह कहते दिख रहे हैं कि, "योजनाबद्ध तरीके से हमारी संस्कृति का संहार किया जा रहा है। राजनीति में यह कहा जाता है कि अगर एक देश, दूसरे देश को खत्म करना चाहता है तो सबसे पहले उसकी बोली और लिखी जाने वाली भाषा को खत्म करना पड़ता है।"
 
अमेरिकी अखबार से बातचीत के दौरान ताशी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तारीफ की। उन्होंने कहा कि वह चीनी कानून के दायरे में रहते हुए तिब्बती भाषा को बचाने पर काम करेंगे। अभियोजन पक्ष इस बयान को नजरअंदाज करना चाहता है।
 
असल में तिब्बत के मुद्दे पर चीन हमेशा बेहद संवेदनशील हो जाता है। चीन कहता है कि उसने 1951 में "शांतिपूर्वक" तिब्बत को आजाद कराया। और अब वह इस पिछड़े इलाके का विकास कर रहा है। वहीं कई तिब्बती लोग चीन पर तिब्बत को तबाह करने का आरोप लगाते हैं। बीजिंग पर तिब्बत में चीन के बहुसंख्यक हान समुदाय को योजनाबद्ध तरीके से बसाने के आरोप लगते हैं। मानवाधिकार गुटों का आरोप है कि हानों को तिब्बत में बड़ी संख्या में बसाकर चीन स्थानीय संस्कृति और बौद्ध धर्म के तिब्बती स्वरूप को खत्म करने में लगा है।
 
चीन के संविधान में बोलने की आजादी है, लेकिन जैसे ही कोई सरकार की नीतियों को चुनौती देता है, वैसे ही मुश्किल शुरू हो जाती है। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शासन में ऐसा दमन तेज हुआ है।
 
अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ताशी वांगचुक के मुकदमे कड़ी आलोचना की है। एमनेस्टी की पूर्वी एशिया के रिसर्च डायरेक्टर रोसेआन रिफे के मुताबिक, "ये साफ तौर पर चालाकी भरे आरोप हैं और उन्हें तुरंत बिना किसी शर्त के रिहा किया जाना चाहिए।"
 
ओएसजे/एनआर (एएफपी)

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