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क्या मैसेज में लिखी जा सकती है वसीयत?

Updated: गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017 (11:37 IST)
ऑस्ट्रेलिया में एक व्यक्ति ने आत्महत्या के पहले अपनी वसीयत मोबाइल के ड्राफ्ट मैसेज में लिख छोड़ी। पत्नी और बेटे की जगह भाई और भतीजे के नाम संपत्ति करने से इस वसीयत पर विवाद हो गया था। अक्टूबर 2016 में आत्महत्या से पहले 55 वर्षीय व्यक्ति ने एक मैसेज लिख कर ड्राफ्ट में छोड़ा। बिना किसी को भेजे गए इस मैसेज में उस व्यक्ति ने लिखा कि उसका घर और पेंशन उसकी पत्नी या बेटे के बजाये उसके भाई और भतीजे के नाम हो।
 
इस मामले में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि मैसेज का अनौपचारिक तरीका मृतक के वसीयतनामे के इरादों का प्रतिनिधित्व करने के लिए पर्याप्त है। कोर्ट ने पाया कि इससे पहले भी एक अन्य मामले में एक डीवीडी को वसीयत के तौर पर पर्याप्त सबूत माना गया था। इसमें डीवीडी पर लिखा हुआ था 'मेरी वसीयत।'
 
मोबाइल के मैसेज में लिखी गयी वसीयत में व्यक्ति के भाई और भतीजे को संबोधित किया गया था। इसमें लिखा गया था कि उसके पास जो सब कुछ है, घर और पेंशन उसे वे लोग रखें और उसकी राख को बगीचे में दफना दें। मैसेज में उसकी पत्नी के लिए लिखा गया था कि वह अपना सामान ले लेगी। साथ ही यह भी की घर की टीवी के पीछे कुछ पैसे रखे हैं और कुछ पैसे बैंक में जमा हैं। वसीयत के आखिरी में लिखा गया था "मेरी वसीयत", जिसके बाद एक स्माइली थी।
 
मृतक की पत्नी और पहली शादी से हुए बेटे ने अनऔपचारिक तरीके से लिखी गयी इस वसीयत को कोर्ट में चुनौती दी थी। महिला ने दलील दी थी कि क्योंकि यह मैसेज किसी को भेजा नहीं गया था इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि मृतक ने पूरी तरह से इस बारे में सोच ही लिया था और इसे कानूनी वसीयत के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
 
कोर्ट ने महिला की दलील खारिज करते हुए पाया कि व्यक्ति के मैसेज में लिखे हुए शब्द यह दिखाते हैं कि वह अपने उन शब्दों को अपनी वसीयत के तौर पर दर्शाना चाहता है। कोर्ट ने पाया कि मृतक का कोई "असली रिश्ता नहीं था।" उसके बेटे और पत्नी दोनों के बीच बहुत खराब रिश्ते थे। हालांकि, मृतक ने अपनी पत्नी के नाम कोई संदेश नहीं छोड़ा लेकिन कोर्ट का कहना है कि पत्नी और बेटा परिवार के कानून के तहत संपत्ति के हिस्से पर दावा कर सकते हैं।
 
- एसएस/एनआर (एएफपी)

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