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गणित में कमजोर कर देता है वायु प्रदूषण

Updated: बुधवार, 29 अगस्त 2018 (11:41 IST)
आज वायु प्रदूषण शहरों के लिए सिरदर्द बन गया है। अब तक यह माना जाता रहा है कि प्रदूषण इंसान के फेफड़ों और दिल को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन एक स्टडी का दावा है कि प्रदूषण इंसान के मस्तिष्क पर भी असर डालता है।
 
 
वायु प्रदूषण का प्रभाव इतना गहरा हो सकता है कि लोगों को साधारण शब्द बोलने या आसान गुणा-भाग करने में कठिनाई महसूस होने लगे। साइंस पत्रिका, प्रोसिडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस (पीएनएसएस) में छपी एक रिपोर्ट में दो अमेरिकी यूनिवर्सिटियों, येले और पेकिंग के वैज्ञानिकों की संयुक्त स्टडी के बाद यह नतीजे निकाले गए हैं।
 
 
स्टडी के दौरान पता चला है कि वायु प्रदूषण से लगातार सामना व्यक्ति पर हानिकारक प्रभाव डालता रहता है। जिसके चलते लोगों में अल्जाइमर और डिमेंशिया का जोखिम भी बढ़ जाता है। रिसर्च टीम ने 2010 से 2014 के दौरान करीब 32 हजार चीनी लोगों पर सर्वे किया। इस सर्वे में उन्होंने देखा कि ये लोग वायु प्रदूषण की जद में कितना रहे। हर साल के डाटा का तुलनात्मक अध्ययन कर रिसर्चरों ने देखा कि प्रदूषण के संपर्क में रहने से लोगों की बोलचाल क्षमता और गणित क्षमता पर असर होता है।
 
 
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक स्टडी में शामिल अमेरिका के इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने एक रिलीज में कहा है कि प्रदूषण का असर महिलाओं की तुलना में पुरुषों पर अधिक होता है, लेकिन उम्रदराज लोगों पर यह प्रभाव सबसे ज्यादा है। खासकर ऐसे लोगों को ये समस्याएं अधिक आती हैं जो कम पढ़े-लिखे हैं।
 
 
चीन की तरह ही दुनिया के कई विकासशील देश इन दिनों वायु प्रदूषण के खतरों से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य और निम्न आय वाले देशों के 98 फीसदी शहर, जहां की जनसंख्या एक लाख से ज्यादा है विश्व स्वास्थ्य संगठन के वायु गुणवत्ता दिशानिर्देशों का पालन करने में असफल रहे हैं। कुल मिलाकर यह स्टडी दावा करती है कि वायु प्रदूषण का असर दिमाग पर पड़ता है, जो गणित और बोलचाल की क्षमता पर असर डालता है।
 
रिपोर्ट अपूर्वा अग्रवाल
 

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