suvichar

एक पद्य कथा : अभिमानी का सिर नीचा

Updated: सोमवार, 6 अप्रैल 2026 (16:33 IST)
यहां एक मौलिक और अप्रकाशित पद्य कथा प्रस्तुत हैं...
 
एक संत के पास एक दिन,
एक आदमी आया। 
बोला पानी पर चलने का,
मंत्र सीख मैं आया। 
 
दौड़ लगाकर पानी पर मैं,
नदी पार जाता हूं। 
भरी बाढ़ में जल पर चलकर,
वापस आ जाता हूं। 
 
संत खुश हुए बोले बच्चे,
ज्ञान ठीक पाया है। 
पर बतलाओ इस पर कितना,
समय किया जाया है। 
 
कहा पुरुष ने बीस वर्ष में,
हुनर सीख मैं पाया। 
की वन में एकांत साधना,
तब मंजिल पा पाया। 
 
बोले संत, रुप ए दस देकर,
नदी पार जाता हूं। 
इतने ही नाविक को दे फिर ,
वापस आ जाता हूं। 
 
बीस रुपए के लिए व्यर्थ ही,
इतने वर्ष गंवाए। 
समय गंवाकर बोलो इतना,
जग को क्या दे पाए। 
 
बातें सुनकर प्रवर संत की,
पुरुष बहुत शरमाया। 
अभिमानी सिर नीचा करके,
घर को वापस आया। 
 
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस: जानिए इतिहास और इसका महत्व

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर निबंध: जानें भारत की आजादी का इतिहास और महत्व

अगला लेख