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Written By WD Feature Desk
Last Updated : मंगलवार, 13 जनवरी 2026 (14:58 IST)

मकर संक्रांति और पतंगबाजी पर बेहतरीन कविता

Makar Sankranti festival
Makar Sankranti festival poem: मकर संक्रांति के पर्व पर पतंगबाजी पर एक बेहतरीन कविता। इस कविता के माध्यम से मकर संक्रांति के उत्सव की खुशियां और पतंग उड़ाने के रोमांच को महसूस किया जा सकता है। यह कविता जीवन में नए उत्साह और दिशा पाने का संदेश देती है, जैसे पतंग आसमान में ऊंचा उड़ने के लिए प्रेरित करती है।
 
उड़ती पतंग, रंग-बिरंगी छाई,
आसमान में रंगों की बौछार आई।
सूरज की किरणों से सजी यह सुबह,
नया उत्साह, नई उमंग, नई राह आई।
 
मकर संक्रांति का पर्व है आज,
सर्दी को विदा, बधाई हो खुशियां साज।
पतंगों के संग उड़ें हमारे ख्वाब,
हर आकाश में हो हमारे हौसले का राग।
 
आसमान में तिनकों सी सपने उड़ें,
नए आरंभ की किरणों में घुंघरू बजें।
हर धागे में बसी है एक उम्मीद,
हर पतंग में है छुपी एक नई ज़िद।
 
दूर से जो देखते हैं हमें उड़ते,
उनकी आंखों में भी ख़्वाबों की रज़ा है।
डोर की पकड़, दिल की उम्मीदों जैसी,
जो कभी न टूटे, वो मजबूत रिश्तों जैसी।
 
मकर संक्रांति की ऊंचाई पर चढ़ें,
हम अपनी पतंगों को और ऊंचा उड़ाएं।
संजीवनी हो हमारी मेहनत की डोर,
इस दिन हम पाएं अपनी मंजिल का छोर।
 
पतंग उड़ाएं, उड़ें ख्वाबों के साथ,
जीवन में खुशी हो, हो हर राह साफ।
मकर संक्रांति की हर एक सुबह हो खास,
आसमान में रंगीन हो हर एक विश्वास।

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