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एक अप्रैल पर कविता : अप्रैल फूल

गुरुवार,अप्रैल 1, 2021
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हाथ चलाया जोरों से तो, फूट गई पिचकारी। रम्मू के मुंह पर ही आई, ठेल रंगों की सारी।
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holi ki kavita : होली के रंग

शनिवार,मार्च 27, 2021
वोट बैंक की आड़ में, लोग राजनेता बन रहे हैं। नाम राम का हो, या रहीम का, चलता हुआ भारत का पथ, लोगों को डरा रहा है।
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लाल-लाल खिला पलाश सृष्टि की छवि मन हरती। फिर अपने आंगन में आई बसंती होली। मन पुलकित, तन पुलकित
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बच्चों की हुड़दंग है, उड़ी अबीर-गुलाल, तन रंग में डूबा हुआ, मन है मालामाल। सिलबट्टे पर बैठकर, कक्कू घिसते भांग, दद्दू राजा नाचते, बना-बनाकर स्वांग।
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नाचो मगन, जरा रंग लो ये तन-मन, आया रे आया रंगों का त्योहार नाचो होके मगन। सखियों संग राधा पनघट पे आई
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हिन्दी कविता : लौट आओ गौरैया

गुरुवार,मार्च 18, 2021
याद आता है वो तेरे ठुमुक-ठुमुक कर चलना, फुदक-फुदककर साथियों से ठिठौली करना! पेड़ों से छत पर आना और चोंच में दाना,
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मुन्ना राजा धरमपुरा के, सचमुच के हैं राजा। जिसका चाहें ढोल बजा दें, जिसका चाहें बाजा। पांच बजे सोकर उठते हैं,
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अक्कड़ मक्कड़ धूल में धक्कड़ दोनों मूरख दोनों अक्खड़ गर्जन गूंजी, रुकना पड़ा, सही बात पर झुकना पड़ा।
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कुछ तो बोलो बैगन भैया, तुम पढ़ते हो कक्षा कौन? क्यों गुमसुम चुपचाप खड़े हो, साध रखा है बिल्कुल मौन।
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पास हो गए पहले नंबर, ठोको ताली। जाएंगे नाना के घर कल, ठोको ताली।
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तीन छछूंदर चढ़े रेल में, बिना टिकिट पकड़ाए। टी टी ने जुर्माना ठोका, रुपए साठ मंगाए।
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बाल कविता : बारह मासा

मंगलवार,मार्च 2, 2021
प्रथम महीना चैत से गिन राम जनम का जिसमें दिन।। द्वितीय माह आया वैशाख। वैसाखी पंचनद की साख।।
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अम्मा ने तो धरो कलेबा, रोटी-साग एक डिब्बा में, लडुआ-बेसन के धर दये हैं, जो आये तोरे हिस्सा में।
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बसंती रंग का जादू धरा फूली न समाई पीली पत्ते पेड़ों ने उतारे
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बाल कविता : कैसे दिखते गांव

मंगलवार,फ़रवरी 9, 2021
ऊपर से कैसी दिखती है, प्यारी धरती सारी। कैसे दिखते नदी, झील सब, खेत, बाग, फुलवारी।। गहरा सागर, ऊंचे पर्वत, कैसे दिखते होंगे?
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पेट की कविता में, कांधे पर बीवी का शव, रखे दाना मांझी है। अस्पताल में, मौत से लड़ता, आम आदमी है।
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फनी कविता : कोयल की छिपा छाई

शुक्रवार,फ़रवरी 5, 2021
कोयल खेले छिपा छाई, देती नहीं हमें दिखाई। शर्त उसने एक लगाई, दूं मैं अगर तुम्हें दिखाई।
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फनी बाल कविता : लोरी

मंगलवार,फ़रवरी 2, 2021
अक्कड़-बक्कड़ बबे बो, सो जा कन्नू अब ना रो। देऊंगी री ऐसी गुड़िया,
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तोता बोला टें टें टें पेड़ शुद्ध वायु दें कौआ बोला कांव-कांव पेड़ लगाओ देंगे छांव
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