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सर्दी के दिनों पर चटपटी कविता : शीत लहर के पंछी

शुक्रवार,फ़रवरी 14, 2020
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कड़क ठंड है कहीं न जाएं। घर में रहकर मौज मनाएं। सूरज जब हड़ताल पर बैठा, पाएं न हम भी क्यों छुट्टी।
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बाल कविता : समय का मूल्य

बुधवार,फ़रवरी 12, 2020
रोज सुबह तड़के उठकर अब, सैर-सपाटे करना है। बड़े लगन से मेहनत करके,
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न से नफरत झ से झगड़ा कभी न पढ़ना भाई।
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मुन्ना हंसता मुन्नी हंसती, रोज लगाते खूब ठहाके। लगता खुशियों के सरवर में, अभी आए हैं नहा-नहाके।
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रज्जो ने सज्जो के दोनों, सज्जो ने रज्जो के दोनों, पकड़े कान।
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दीना इस कक्षा में पहली श्रेणी तो लेकर ही आए, साथ में नेक कर्म से अपने वो तो सबका आदर पाए।
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ऋतु आई है फिर बसंत की। हवा हंस रही दिक दिगंत की। सरसों के पीले फूलों ने, मटक-मटक कर शीश हिलाएं।
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शेर सिंह को ठंड लगी तो, लाए एक रजाई। ओढ़ तानकर खूब सोए वे,
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दाढ़ी के डिब्बे से बंदर, भाग गया लेकर सामान। दाढ़ी उसकी बहुत बड़ी है, अभी-अभी आया है ध्यान।
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सूपा लेकर भागे फूफा, फुप्पी हो गईं गुस्सा। दौड़ी फूफाजी के पीछे,
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कौआ बोला कांव-कांव जी बार-बार बस कांव-कांव जी। बोली मुन्नी, छत पर चलना, मुझे अभी कौए से मिलना।
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New Year 2020 Poem- स्वागत को तैयार रहो तुम। मै जल्द ही आने वाला हूं। बारह महीने साथ रहूंगा। खुशियां भी लाने वाला हूं।
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नववर्ष पर कविता- दीवारों पर लगेंगे। नए कैलेंडर। पुराने हटाएं जाएंगे।
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स्कूल जाते बच्चों की मां, उठ जाती है बड़ा पछिलहरा में, कर देती है बच्चों का टिफिन तैयार , उन्हें नहा-धुला और दुलार कर बिठा देती हैं उन्हें बस रिक्शे और ठेले पर
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खाली नहीं बैठना हमको, कुछ न कुछ करते रहना है। गरमी की छुट्टी में रम्मू, प्यारे-प्यारे चित्र बनाता। उन्हें बेचकर मजे-मजे से, रुपए रोज कमाकर लाता। इन रुपयों से निर्धन बच्चों, की उसको सेवा करना है।
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पप्पू सोया देखा सपना, जो सोचा वह हो जाने दो। नियमों में कर दो फेरबदल, बच्चा सरकार बनाने दो।
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लाल बहादुर शास्त्री पर कविता- जीवन के सूखे मरुथल में, झेले ये झंझावात कई। जितनी बाधा, कंटक आते, उनसे वे पाते, शक्ति नई।
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झाड़ू लेकर साफ-सफाई, कर दी अपने कमरे की। टेबिल कंचन-सी चमकाई। कुर्सी की सब धूल उड़ाई। पोंछ-पांछ के फिर से रख दी, चीजें पढ़ने-लिखने की।
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बापू जैसा बनूंगा मैं, राह सत्य की चलूंगा मैं। बम से बंदूकों से नहीं, बापू जैसा लडूंगा मैं।
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