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बाल गीत : हरा पुदीना

शुक्रवार,जून 21, 2019
pudina
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बाघ आ गया बाघ आ गया, कहकर चरवाहा चिल्लाया। आए गांव के लोग वहां तो,
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अच्छे लगते हैं पापा, जब मुस्काते हैं। अच्छे लगते हैं जब वे, गुन-गुन गाते हैं।
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बाल वीर या पोगो ही, देखूंगी, गुड़िया रोई। चंदा मामा तुम्हें आजकल, नहीं पूछता कोई।
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लगता है इस मुन्नी के तो, कसकर धौल जमा दूं। ले लेती है बिस्कुट सारे, लेती ब्रेड हाथ से छीन।
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हाथी चाचा ने जंगल में, एक आदेश निकाला। बूढ़े और प्रौढ़ पशुओं को, खोलेंगे अब शाला।
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सिर पर बस्ता लादे शाला, जाते राम कटोरे। मिले आम के पेड़ राह में, झट उस पर चढ़ जाते। गदरे- गदरे आम तोड़कर,
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आई गलगला से है मौसी, चाची सदर बाजार से। मामा आए स्कूटर से, मामी आई कार से।
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इ ट्टू बिट्टू किट्टू राम, तोड़ लाए चोरी से आम। पकड़े गए मगर तीनों, चुका दिए चुपके से आम।
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सारे मित्रों और सखाओं, चलो बनाएं रेल। रेल बनाकर साथ चले तो, बढ़ जाएगा मेल।
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कोल्ड ड्रिंक भले हो बिकता, भाता सबको पानी है, दादा-दादी ताऊ-ताई पानी पीती नानी है
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खाली नहीं बैठना हमको, कुछ न कुछ करते रहना है। गरमी की छुट्टी में रम्मू, प्यारे-प्यारे चित्र बनाता।
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सूरज को संदेशा दो मां, ठीक नहीं है गाल फुलाना। बिना बात के लाल टमाटर, बनकर लाल-लाल हो जाना
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होठों पर मुस्कान खिली है,आंखों में है जादू। मुझे देखकर खुश कितने हैं, मेरे अम्मा बापू।
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मैंने खाया शक्कर पुंगा,आटे की चिर्रु खाई। मां ने गरम-गरम रोटी पर, पहले चुपड़ा देशी घी।
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बड़ा मजा है! गर्मी है!! उड़े भले कितनी ही धूल, हमें न अब जाना स्कूल,
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बचपन की यादें जैसे जादू का पिटारा सब कुछ जादुई अनोखा !! पिटारे से निकलता एक कबूतर कुछ रंगबिरंगे खुशबूदार फूल एक लंबा-सा ...
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तीन साल के गुल्लू राजा, हैं कितने दिलदार दबंग। जब रोना चालू करते हैं, रोते रहते बुक्का फाड़।
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साठ साल में सीखा मैंने, रामायण गीता पढ़ना। पोते लखनलाल से सीखा, है क ख ग घ लिखना।
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खीर पुड़ी के गए जमाने, अब दिन पिज्जा बर्गर के। लगे बताने दादाजी को, बच्चे सारे ही घर के।
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