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बाल गीत : पानी झर-झर गाता है

Updated: सोमवार, 11 अप्रैल 2022 (11:45 IST)
नदी नाचती रेत उछलती,
पानी झर-झर गाता है।
एक बुलबुला बहते-बहते,
बन-बन कर मिट जाता है।
 
नदी किनारे पेड़ खड़े हैं।
कुछ छोटे कुछ बहुत बड़े हैं।
इन पेड़ों को नदी किनारे,
हरदम रहना भाता है।
पानी झर-झर गाता है।
 
पेड़ नहीं डरते पानी से,
न आंधी की शैतानी से।
डरे नहीं जो तूफानों से,
जग उनसे डर जाता है।
पानी झर-झर गाता है।
 
बिना रुके नदिया बढ़ जाती,
शिला, पहाड़ी रोक न पाती।
कभी-कभी तो तेज बाढ़ में,
पुल तक तो ढह जाता है।
पानी झर-झर गाता है। 

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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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