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शरद पूर्णिमा पर हिन्दी कविता...

Updated: गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017 (13:07 IST)
पूनम की चांदनी आज खिलेगी,
बरसेंगे अमृत मोती।
रोग-दोष छूमंतर होंगे,
खिलेगी जैसे ज्योति।
 
सोलह कला समाहित होंगे,
टिम-टिम करेंगे तारे। 
जिस पर चंदा करेंगे कृपा,
जन होंगे बड़े निराले।
 
महक उड़ेगी नभ मंडल तक,
जब लहराएगी चोटी।
रोग-दोष छूमंतर होंगे,
खिलेगी जैसे ज्योति। 
 
भ्रमण करेगी लक्ष्मी माताजी,
स्वागत करेगी रजनी।
धनी पापमुक्त मानव होंगे,
मिट जाएगी कजरी।
 
पूजा-पाठ सब भक्त करेंगे,
चलती रहेगी रोजी-रोटी। 
रोग-दोष छूमंतर होंगे,
खिलेगी जैसे ज्योति। 
लेखक के बारे में
शम्भू नाथ

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