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बाल कविता : सूरज करता चम-चम

Updated: गुरुवार, 1 सितम्बर 2022 (16:03 IST)
सूरज करता चम-चम-चम-चम,
पानी झिलमिल करता।
सरिता जल में सुबह नहाने,
सूरज रोज उतरता।
 
रगड़-रगड़ कर अपने तन का सारा मैल छूटाता।
इसी मैल से रंग पानी का,
लाल-लाल हो जाता।
 
किरणों के घोड़े पर चढ़कर धूप धरा पर आती।
सोती, ऊंघ रही कलियों को,
हाथों से दुलराती।
 
पाकर छुअन धूप की, कलियां,
हौले से मुस्कतीं।
बन जाती हैं फूल, हवा से,
हंसकर के बतियातीं।

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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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