हिन्दी कविता : चौबीस ती‍लियों वाला तिरंगा ध्वज



हे ध्वजा! राष्ट्र की, नील-गगन पर फहरो,
उन्मुक्त पवन में, लहर-लहर तुम लहरो।

तेरा केशरिया रंग, वीर का बाना,
सीखा है इससे, सबने प्राण लुटाना।

और श्वेत रंग, जो धवल चांदनी सा है,
वह विश्व-शांति का, सबको संदेशा है।

और हरित रंग जो, फैला हरियाली सा,
वह उन्नति ऋद्धि-सिद्धि का, संदेशा है।

वह नील चक्र, चौबीस ती‍लियों वाला,
आगे बढ़ने की, बात करे मतवाला।

बस बढ़े देश का मान, न हो कुछ बांका,
हमको प्राणों से बढ़कर राष्ट्र-पताका।

हे ध्वजा! राष्ट्र की, नील-गगन पर फहरो,
उन्मुक्त पवन में, लहर-लहर तुम लहरो।

साभार - बच्चो देश तुम्हारा



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