ramcharitmanas
✕

फनी कविता : बद अच्छा, बदनाम बुरा

Updated: बुधवार, 9 मई 2018 (15:15 IST)
- गिरेन्द्रसिंह भदौरिया 'प्राण'
 
तोतापरी, दशहरी, लंगड़ा, हापुस, नीलम, लालमुंहां।
केशर, देशी, खट्टा, चौसा, कलमी क्या बादाम यहां।।
 
एक टोकरी में आ बैठे शुरू हो गई आम सभा।
भाषण होने लगे दनादन दिखा दिखाकर स्वयं प्रभा।।
 
हापुस बोला फल मंडी के हम राजा पर नाम बुरा।
हम सब 'खास म खास' किंतु क्यों नाम हमारा 'आम' बुरा।।
 
बोल उठा बादाम नाम का पाया है अंजाम बुरा।
काजू किशमिश के संग रहता एक और बादाम बुरा।।
 
आमों के राजा लंगड़े की शुभ काया, पर नाम बुरा।
उसको सब लंगड़ा कहते हैं, बद अच्‍छा बदनाम बुरा।।
 
केसर, देशी, खट्टा-मीठा सुनते-सुनते ऊब गए।
नीलम, कलमी, लालमुंहें सब खुसुर-पुसुर में डूब गए।।
 
तब बंबइयां संचालक ने सभाध्यक्ष को याद दिया।
चौसे ने रस बरसा कर दी सराबोर पांडाल किया।।
 
रस की रानी हरी दशहरी ने सबका सत्कार किया।
तोतापरी मंच पर आया, आमों का आभार किया।।
 
साभार - देवपुत्र

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

मूर्खता भी बन सकती है कृत्रिम बुद्धिमत्ता, AI पर क्यों आमने-सामने हैं अमेरिका और चीन

कब मनाया जाएगा आचार्य विद्यासागर का जन्‍मोत्‍सव, जानिए उनके जीवन से जुड़ी खास बातें...

कौन थे महर्षि वाल्मीकि? कब मनाई जाएगी उनकी जयंती? जानिए उनके बारे में रोचक बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शक्ति और सामर्थ्य से सार्थक हो रहा है भारत

विश्वास टूटता कहां है और बनता कैसे है?

अगला लेख