sundarkand

चिट्ठी-पत्री पर फनी कविता : मां चिट्ठी कैसी होती थी

Updated: शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020 (15:46 IST)
- सुकीर्ति भटनागर
 
मां चिट्ठी कैसी होती थी,
मुझको जरा दिखाना।
पढ़ चिट्ठी कैसा लगता था,
मुझको जरा बताना।।
 
क्या लिखती थीं दादी-नानी,
उस प्यारी चिट्ठी में?
क्या चेहरा दिखता था उनका,
उस न्यारी चिट्ठी में।।
 
सुन बालक की भोली बातें,
मां का मन हर्षाया।
होता क्या था चिट्ठी में,
मां ने उसे बताया।।
 
चिट्ठी में होती थीं बेटा,
कई गांव की बातें।
रहट-बैल की बातें होतीं,
धूप-छांव की बातें।।
 
बातें होती थीं झूलों की,
बातें थीं सावन की।
बातें पनिहारिन-पनघट की,
बातें घर-आंगन की।।
 
पूछा करती थी चिट्ठी में,
दादी तेरा हाल।
लिखती फागुन में आ जाओ,
खेलेंगे रंग-गुलाल।।
 
अमराई की गूंज भरी,
बातें होती चिट्ठी में।
खेतों की बातें होती थीं,
गंध जहां मिट्टी में।।
 
नीम-बेल, तुलसी चौरे की,
नानी बातें करती।
पढ़ सखियों की बातें मेरी,
आंखें झर-झर झरतीं।।
 
जैसे तुम कम्प्यूटर में ही,
देख सभी को पाते।
देख फिल्म, टीवी तुम हर दिन,
अपना मन बहलाते।।
 
बेटा स्नेहभरी वे चिट्ठियां,
मेरा मन बहलाती।
लगा कल्पना पंख सलोने,
मैं सबको मिल जाती।।
 
साभार - देवपुत्र

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

रोजाना अपनाएं ये 10 जादुई आदतें, बीमारियों से रहेंगे कोसों दूर और चेहरे पर आएगा गजब का ग्लो

डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों 'मन अनहद नाद' और 'अनकहे से संवाद' का भव्य विमोचन

राष्ट्र निर्माता शिक्षक का सम्मान एक ही दिन क्यों?

बच्चों के मन को सबल और एकाग्र करने का आनापान ध्यान शिविर

जन नेता कामरेड होमी एफ दाजी - शताब्दी पर जयजगत!

अगला लेख