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बाल कविता : अनमोल खजाना

Updated: गुरुवार, 15 जून 2023 (13:12 IST)
इतने छोटे एक रुपए में,
होते पूरे सौ नए पैसे।
पापाजी ने मुझे बताया,
मुझको लगा अजूबा जैसे।
 
एक रुपए में मुश्किल से ही,
अब तो चॉकलेट मिल पाती।
एक नए पैसे में बोलो,
बोलो पापा क्या था आता।
 
पापा बोले नए पैसों की,
किसी समय कीमत थी भारी।
बीस नए पैसों में मिलती,
एक किलो भर थी तरकारी।
 
एक नए पैसे में हम तो,
चॉकलेट दो-दो ले आते।
पांच नए पैसों में मीठे,
बिस्कुट के पैकेट मिल जाते।
 
आज भले ही एक रुपए का,
सबने मोल बहुत कम माना।
किसी समय तो दस पैसा ही,
होता था अनमोल खजाना।

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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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