suvichar
✕

बाल कविता : हम बच्चे जिंदाबाद

Updated: शनिवार, 15 जुलाई 2023 (13:05 IST)
kids poem : खेलकूद खाने-पीने को,
अब हम हैं आजाद।
हम बच्चे जिंदाबाद।
पिज़्ज़ा बर्गर चाउमिन का,
दही बड़ों का हल्ला।
यह सब देने में अब मम्मी,
नहीं झाड़ती पल्ला।
गर्मी की छुट्टी, सारा घर,
ऊधम से आबाद।
पना आम का, कच्ची कैरी,
और पुदीना चटनी।
गन्ने का रस पीकर देते,
लू को रोज पटकनी।
तन मन को ठंडा कर देता,
सत्तू का भी स्वाद।
दिन भर धमा चौकड़ी,
हाथी घोड़े वाले खेल।
इंजन, डिब्बा, गार्ड, मुसाफिर,
छुक-छुक करती रेल।
कैरम में जो जीता, करता,
खुशियों से सिंहनाद।
 
(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)

ALSO READ: बाल कविता : मम्मी मैं भी बड़ी हो गई

ALSO READ: टमाटर खाओ : मस्त फनी कविता
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती पर क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस?

31 अक्टूबर पुण्यतिथि: इंदिरा गांधी की मृत्यु कब, कहां, क्यों और कैसे हुई थी?

वाणी साहित्य उत्सव का आगाज, पहले दिन युद्ध, स्त्री विमर्श और एआई के दौर में लेखन पर हुआ मंथन

वर्ल्ड स्ट्रोक डे: स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही लें चिकित्सकीय सहायता, हर मिनट है कीमती

बौखलाए नेताओं की बेरहमी का ये सबसे निर्दयी उदाहरण है, 200 पेड़ों से हजारों परिंदों के आशियाने उजाड़कर मेट्रो चलाएंगे

अगला लेख