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बच्चों की मजेदार कविता : आलो बालो

Updated: सोमवार, 10 फ़रवरी 2020 (14:12 IST)
kids poem
रज्जो ने सज्जो के दोनों,
सज्जो ने रज्जो के दोनों,
पकड़े कान।
 
कान पकड़ कर लगी खेलने,
आलो बालो, आलो बालो।
 
आगे पीछे कान हिलाकर,
बोली मन के चना चबा लो।
 
सज्जो बोली कान छोड़ अब,
कानों की ले अब मत जान।
            
फिर खेलीं, फिर चाल बढ़ाई,
खिचने लगे जोर से कान।
 
दर्द बढ़ा धीरे-धीरे तो,
फिर आई आफत में जान।
 
दोनों लगीं चीखने बोलीं,
धीरे कान खींच शैतान।
 
थके कान तो रज्जो बोली,
चलो खेल अब बंद करें।
 
कान छुड़ाकर सज्जों बोली,
कुछ मस्ती आनंद करें।
 
फिर दोनों ने उछल कूद कर,
खुशियों से भर दिया मकान।
 
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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