बाल कविता : रजाई


सिंह को ठंड लगी तो,
लाए एक रजाई।
ओढ़ तानकर खूब सोए वे,
नींद मजे की आई।

नींद खुली तो पाई उन्होंने
नई गायब।

पता नहीं मोटा सा चूहा
पूरी काट गया कब।




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