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आज ज्येष्ठ मास का बड़ा मंगल है जानिए महत्व और पूजा विधि

मंगलवार,मई 24, 2022
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कई लोग हनुमान चालीसा नियमित पढ़ते हैं और कई लोग मंगलवार या शनिवार को ही हनुमान चालीसा पढ़ते हैं। हनुमान चालीसा पढ़ने के कुछ नियम होते हैं और इसे पढ़ने में पवित्रता एवं शुद्धता के साथ ही पवित्र भावना का भी ध्यान रखना जरूरी है। अन्यथा इसका फल नहीं ...
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कई लोग हनुमान चालीसा नियमित पढ़ते हैं और कई लोग मंगलवार या शनिवार को ही हनुमान चालीसा पढ़ते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि हनुमान चालीसा पढ़ने का सही तरीका क्या है। आओ जानते हैं कि किस तरह पढ़ना चाहिए हनुमान चालीसा की हमें मिले उत्तम फल।
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Kaise kare hanuman ji ki puja: हनुमानजी की पूजा करना बहुत ही सरल है लेकिन उसके नियम और सावधानियां जानना जरूरी है। पूर्ण भक्तिभाव के साथ ही पवित्र नियम से उनकी पूजा करने से वे बहुत जल्द ही प्रसन्न होकर आपकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। आओ जानते हैं कि ...
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Hanuman puja vidhi at home: हनुमानजी सबसे जागृत देवता हैं और कलिकाल में उनकी ही पूजा फलदायी मानी गई है। मंगलवार को घर पर हनुमानजी की पूजा करने का सबसे सरल तरीका यहां पर जानिए। इसके साथ ही आप नित्य हनुमान चालीसा पढ़ते रहेंगे तो कल्याण होगा। हनुमान जी ...
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Hanuman chalisa ka path kitni baar karna chahie : हनुमान चालीसा का पाठ कितनी बार करें? हनुमान चालीसा में अंत में एक चौपाई आती है कि जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बंदि महासुख होई' इसमें कई लोग अनुमान लगाते हैं कि सत बार का अर्थ सात बार है, कुछ लोगों के ...
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हर घर में हनुमानजी की मूर्ति या चित्र होते हैं। हनुमानजी का हर चित्र किसी न किसी के कारण ही लगाया जाता है। उस कारण या समस्या को जानकर ही चित्र या मूर्ति रखें। घर में हनुमानजी के चित्र कहां और किस प्रकार के लगाएं यह जानना जरूरी है। आओ आज हम आपको ...
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Hanuman ji ki mahan katha : हनुमानजी की यूं तो कई महान कथाएं हैं लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं हनुमानजी और शनिदेव से जुड़ी कुछ कथाएं। शनिदेव खुद को बहुत शक्तिशाली मानते थे और उनमें घमंड भी बहुत था लेकिन हनुमानजी से जब हुआ उनका सामना तो क्या हुआ? ...
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Hanuman janmotsav 2022: हनुमानजी का जन्म त्रेतायुग में हुआ था। इस युग में वामन, परशुराम और भगवान श्री राम का अवतार भी हुआ था। कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि हनुमान जी अपने पिछले जन्म में कौन थे।
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केसरी नंदन का जन्म कैसे हुआ?

मंगलवार,अप्रैल 19, 2022
Hanuman janmotsav 2022: 16 अप्रैल शनिवार को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। जन्म कथा (Hanuman janam katha) हमें पुराणों में भिन्न-भिन्न रूप में मिलती है। उनकी माता का नाम अंजनी और पिता का नाम केसरी था।
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आओ जानते हैं रामभक्त और रुद्रावतार हनुमानजी का संपूर्ण परिचय जिसे आनकर आप चौंक जाएंगे।
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हनुमान जन्मोत्सव पर करें ये 7 सरल उपाय- श्री हनुमान को सिंदूर बेहद प्रिय है। उनकी पूजा से पहले आप उन्‍हें सिंदूरी का लेप लगा सकते हैं। इससे जीवन में सकारात्‍मकता आती है।
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Hanuman janmotsav 2022 : 16 अप्रैल 2022 शनिवार को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। बजरंगबली के यूं तो बहुत सारे मंत्र है, लेकिन यहां प्रस्तुत है 7 सरल मंत्र।
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Hanuman janmotsav 2022: पुराणों में हनुमानजी के बारे में एक बेहद गूढ़ जानकारी मिलती है। इसमें हनुमानजी के भाई, बहन आदि की जानकारी मिलती है। वाल्मिकी रामायण, अद्भुत रामायण, आनंद रामायण आदि सैंकड़ों रामायण के अलावा पुराणों में उनके जीवन का यशगान किया ...
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हनुमान जयंती हनुमान जन्मोत्सव के दिन बजरंगबली की विधिवत पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है साथ ही सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। आइए जानते हैं 5 शुभ मंत्र....
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हनुमान जी का जन्म एक करोड़ 85 लाख 58 हजार 112 वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन हुआ था। हनुमान जी की साधना सरल है। हनुमान जी की पूजा करते समय हमें मन और तन से पवित्र होना चाहिए।
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इस बार हनुमान जयंती 16 अप्रैल को है। इस दिन हनुमानजी की विशेष पूजा करनी चाहिए। इस पूजा में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। त्रेता युग चैत्र मास की पूर्णिमा पर शिवजी के अंशावतार हनुमानजी का जन्म हुआ था। पौराणिक कहानियों के अनुसार कई ...
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मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव या हनुमान जयंती 16 अप्रैल दिन शनिवार को है। भगवान शिव के अवतार हनुमान जी का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को चित्रा नक्षत्र और मेष लग्न में हुआ था। आइए जानते हैं ...
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आज हनुमान प्रतिमा को चोला चढ़ाते हैं। हनुमानजी की कृपा प्राप्त करने के लिए मंगलवार को तथा शनि महाराज की साढ़े साती, अढैया, दशा, अंतरदशा में कष्ट कम करने के लिए शनिवार को चोला चढ़ाया जाता है। साधारणतया मान्यता इन्हीं दिनों की है, लेकिन दूसरे दिनों ...
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पवनपुत्र हनुमान के बारे में कहा जाता है कि वो अमर हैं। वो सदैव धरती की राक्षसों से रक्षा करेंगे। हिन्दू धर्म के सबसे पुराने ग्रंथ रामायण में भी इसका जिक्र मिलता है।
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