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Lord Shantinath jayanti: जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ की जयंती

Updated: गुरुवार, 14 मई 2026 (09:26 IST)
16th Jain Tirthankar Lord Shantinath: जैन शास्त्रों के अनुसार, उन्होंने अपने जीवन में अत्यंत धैर्य, आत्म-नियंत्रण और अहिंसा का पालन किया। भगवान शांतिनाथ के उपदेश मुख्यतः सत्य, अहिंसा, क्षमा और मोक्ष पर आधारित हैं। जैन धर्म में भगवान शांतिनाथ का महत्व इसलिए भी है क्योंकि वे आध्यात्मिक शांति और मानसिक स्थिरता के प्रतीक हैं। उनके अनुयायी उन्हें श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजते हैं और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में संयम और शांति लाने का प्रयास करते हैं।
 
 

यहां उनके जन्म और जयंती से जुड़ी मुख्य जानकारी दी गई है:

 

तिथि और समय

भगवान शांतिनाथ का जन्म ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था, अत: इस तिथि को आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। भगवान शांतिनाथ ने वैराग्य के बाद ज्येष्ठ कृष्णा चतुर्दशी को दीक्षा ग्रहण की, पौष शुक्ला दशमी को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और ज्येष्ठ कृष्णा चौदस को श्री सम्मेद शिखर जी से मोक्ष प्राप्त किया था।
 

भगवान शांतिनाथ का संक्षिप्त परिचय

तीर्थंकर क्रम: 16वें तीर्थंकर
जन्म स्थान: हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश)
माता-पिता: माता ऐरा देवी और पिता राजा विश्वसेन
चिह्न: हिरण
वर्ण (रंग): सुवर्ण (स्वर्ण के समान आभा)
शांतिनाथ के शरीर की स्वर्ण के समान आभा दिखाई देती थी। उनके शरीर पर सूर्य, चन्द्र, ध्वजा, शंख, चक्र और तोरण के शुभ मंगल चिह्न अंकित थे। जन्म से ही उनकी जिह्वा पर मां सरस्वती देवी विराजमान थीं।
विशेष उपलब्धि : वे 'चक्रवर्ती' सम्राट और 'कामदेव' भी थे।
 

जयंती का महत्व और परंपरा

भगवान शांतिनाथ को 'शांति के पुंज' के रूप में पूजा जाता है। उनकी जयंती पर श्रद्धालु निम्नलिखित अनुष्ठान करते हैं:
 
शांति विधान: विश्व में सुख-शांति की कामना के लिए विशेष 'शांति मंडल विधान' का आयोजन किया जाता है।
 
अभिषेक और पूजन: मंदिरों में भगवान की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया जाता है।
 
शांतिधारा: विशेष मंत्रोच्चार के साथ शांतिधारा की जाती है, जिसे बाधाओं और व्याधियों को दूर करने वाला माना जाता है।
 
दान-पुण्य: इस दिन जीव दया (पशु-पक्षियों की सेवा) और निर्धनों की सहायता को विशेष महत्व दिया जाता है।
 

एक महान संदेश

भगवान शांतिनाथ ने धैर्य, संयम और अहिंसा का संदेश दिया। उनका जीवन जैन धर्म के अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक अनुशासन और संयम का आदर्श है। भगवान शांतिनाथ का जीवन हमें सिखाता है कि भौतिक साम्राज्य का त्याग कर आत्मिक शांति प्राप्त करना ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है। उनके नाम का स्मरण मात्र ही मन को स्थिरता और शांति प्रदान करने वाला माना गया है।
 

भगवान शांतिनाथ का अर्घ्य 

 
बसु द्रव्य संवारी तुम ढिग सारी, आनन्द कारी छग प्यारी।
तुम हो भवतारी, करुणा धारी, यातैं थारी शरणारी।
श्री शान्ति जिनेश, नुतनाक्रेशं वृष चक्रेशं, चक्रेशं।
हनि अरि चक्रेशं, हे गुनधेशं, दया मृतेशं, मक्रेशं।
 

मंत्र-

- ॐ ह्रीं श्रीं शांतिनाथ जिनेन्द्राय नमः
- ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं श्री शांतिनाथ जिनेन्द्राय नमः
 
शांतिनाथ जयंती हर साल बड़ी श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, भजन, प्रवचन और दान-पुण्य का आयोजन होता है। जैन अनुयायी इस दिन उपवास, ध्यान और धर्मचर्चा के माध्यम से भगवान शांतिनाथ के आदर्शों को अपनाने का प्रयास करते हैं।

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